सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल किया

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सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल किया

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 09:53 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 09:53 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.4 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

सरकार ने फरवरी में संसद में प्रस्तुत संशोधित अनुमानों में राजकोषीय घाटा यानी व्यय और राजस्व के बीच का अंतर, 15,58,492 करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, वास्तविक रूप से राजकोषीय घाटा 15,19,169 करोड़ रुपये (अस्थायी) यानी संशोधित अनुमान का 97.5 प्रतिशत रहा।

अप्रैल, 2026 के लिए राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 21 प्रतिशत रहा, जो किसी वित्त वर्ष के पहले महीने के लिए सामान्य से कहीं अधिक है। यह राजस्व जुटाने की तुलना में अधिक व्यय को बताता है।

आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 33.02 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो संशोधित बजट अनुमान का 98.8 प्रतिशत है।

सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 26.23 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (केंद्र को प्राप्त शुद्ध राशि), 6.78 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 83,757 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं।

गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में कर्ज की वसूली (24,617 करोड़ रुपये) और विविध पूंजीगत प्राप्तियां (59,140 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

केंद्र सरकार का कुल व्यय 49.05 लाख करोड़ रुपये (वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान का 98.8 प्रतिशत) है। इसमें से 38.36 लाख करोड़ रुपये राजस्व मद में और 10.69 लाख करोड़ रुपये पूंजी मद में खर्च हुए।

कुल राजस्व व्यय में से 12.42 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 4.53 लाख करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडी पर खर्च किए गए हैं।

सरकार का राजकोषीय घाटा वर्ष 2024-25 के लिए सकल घरेलू उत्पाद का 4.8 प्रतिशत था।

आंकड़ों के बारे में इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमान (आरई) से 40,000 करोड़ रुपये कम रहा। इसमें 60,000 करोड़ रुपये व्यय में कटौती का योगदान है, जिसने प्राप्तियों में मामूली कमी की भरपाई कर दी।

उन्होंने कहा कि बाजार मूल्य पर जीडीपी के आंकड़ों में गिरावट के बावजूद, वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहा, जो लक्ष्य के अनुरूप है।

नायर के अनुसार, दिलचस्प बात यह है कि बचत जमा, प्रमाणपत्र और पीपीएफ से प्राप्त राशि संशोधित अनुमान से लगभग एक लाख करोड़ रुपये अधिक रही, जो इक्रा की उम्मीद से अधिक है। इससे सरकार के नकदी शेष में वृद्धि हुई, जबकि संशोधित अनुमान के अनुसार 45,700 करोड़ रुपये की निकासी का अनुमान लगाया गया था।

उन्होंने कहा कि इससे वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार की राजकोषीय स्थिति को कुछ हद तक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अप्रैल माह के लिए राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 21.4 प्रतिशत रहा। यह वास्तविक रूप से 3,62,303 करोड़ रुपये बैठता है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 16,95,768 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 35.33 लाख करोड़ रुपये के राजस्व अनुमान का 5.7 प्रतिशत यानी 2,02,785 करोड़ रुपये का कुल राजस्व एकत्र किया।

हालांकि, कुल व्यय वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान 53.47 लाख रुपये का 10.8 प्रतिशत यानी 5,74,982 करोड़ रुपये रहा।

नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सरकार के लिए निराशाजनक रही, जिसमें कर और गैर-कर राजस्व में सालाना आधार पर गिरावट और राजस्व एवं पूंजीगत व्यय में तीव्र वृद्धि देखी गई। इसके परिणामस्वरूप अप्रैल, 2026 में राजकोषीय घाटा वार्षिक आधार पर लगभग दोगुना हो गया।

उन्होंने कहा कि बजट से अधिक उर्वरक और एलपीजी सब्सिडी, उत्पाद शुल्क, कंपनी कर और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों से लाभांश में कमी जैसे राजकोषीय जोखिम मौजूद हैं। लेकिन सोने और चांदी पर बढ़े हुए आयात शुल्क और आर्थिक स्थिरीकरण कोष में राशि से कुछ हद तक राहत मिलेगी।

भाषा रमण अजय

अजय