सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 87,587 टन अतिरिक्त चीनी निर्यात कोटा आवंटित किया

सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 87,587 टन अतिरिक्त चीनी निर्यात कोटा आवंटित किया

सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 87,587 टन अतिरिक्त चीनी निर्यात कोटा आवंटित किया
Modified Date: March 16, 2026 / 09:24 pm IST
Published Date: March 16, 2026 9:24 pm IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों के अनुरोध के बाद विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए 87,587 टन चीनी के अतिरिक्त निर्यात कोटा को मंज़ूरी दे दी है। मंत्रालय की ओर से सोमवार को एक परिपत्र में यह जानकारी दी गई।

सरकार ने इससे पहले इस सत्र के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, और फरवरी में इच्छुक मिलों को ‘नॉन-स्वैपेबल’ (आपस में न बदले जा सकने वाले) आधार पर 5,00,000 टन अतिरिक्त कोटा आवंटित किया था।

मिलों के पास इस अतिरिक्त कोटे का हिस्सा पाने के लिए फरवरी तक आवेदन करने का समय था। मंत्रालय ने बताया कि 5,00,000 टन के इस कोटे में से केवल 87,587 टन के लिए ही अनुरोध किया गया और उसे मंज़ूरी दी गई, शेष कोटा समाप्त हो गया।

मिलों को आवंटित चीनी का निर्यात 30 जून, 2026 तक करना अनिवार्य है। जो मिलें इस तारीख तक अपने कोटे का कम से कम 70 प्रतिशत निर्यात कर लेंगी, उन्हें शेष मात्रा का निर्यात 30 सितंबर, 2026 तक करने की अनुमति दी जाएगी। यदि कोई मिल 70 प्रतिशत की इस न्यूनतम सीमा को पूरा करने में विफल रहती है, तो उसकी अप्रयुक्त मात्रा खत्म हो जाएगी, और उस मात्रा को बेहतर प्रदर्शन करने वाली या इच्छुक मिलों को पुनः आवंटित किया जा सकता है।

अप्रत्याशित परिस्थितियों के मामलों को छोड़कर, किसी भी अन्य स्थिति में निर्यात की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। इस कोटे को मिलें आपस में एक-दूसरे के साथ बदल नहीं सकती हैं।

जो मिलें अनिवार्य 70 प्रतिशत चीनी का निर्यात करने में विफल रहेंगी, उनके भविष्य के निर्यात कोटे में से उतनी मात्रा की कटौती कर ली जाएगी, जितनी मात्रा से वे इस न्यूनतम सीमा को पूरा करने में पीछे रह गई हैं।

उदाहरण के लिए, यदि किसी मिल को 1,000 टन का कोटा आवंटित किया गया है, लेकिन वह 30 जून तक केवल 400 टन का ही निर्यात कर पाती है, तो उसके अगले कोटे में से 300 टन की कटौती कर ली जाएगी।

आवंटित सीमा के भीतर, चीनी की सभी ग्रेड (किस्मों) का निर्यात किया जा सकता है। जो रिफाइनरियां मिलों द्वारा आपूर्ति की गई ‘कच्ची चीनी’ से ‘रिफाइंड चीनी’ बनाकर उसका निर्यात करना चाहती हैं, वे द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय समझौतों के तहत ऐसा कर सकती हैं, बशर्ते कि निर्यात की जाने वाली मात्रा मूल मिल के आवंटित कोटे की सीमा के भीतर ही रहे।

मार्च, 2025 के एक आदेश के तहत निर्धारित ‘स्टॉक रखने की सीमा’ का उल्लंघन करने वाली मिलें इस सत्र के लिए निर्यात कोटा पाने की पात्र नहीं होंगी। ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (सेज) में स्थित रिफाइनरियों को की गई चीनी की आपूर्ति को भी निर्यात ही माना जाएगा। अग्रिम मंजूरी योजना (एएएस) के तहत होने वाला निर्यात पहले की तरह ही जारी रहेगा।

दिशानिर्देश का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मिलों को एनएसडब्ल्यूएस पोर्टल के ज़रिये हर महीने अपने निर्यात की रिपोर्ट देनी होगी।

मंत्रालय के पास ज़रूरत के हिसाब से निर्यात के तरीकों में बदलाव करने का अधिकार सुरक्षित है।

हाल के उद्योग आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2025-26 सत्र में अक्टूबर से फरवरी के बीच, कुल 15 लाख टन के मंज़ूर कोटे के मुकाबले 3,15,000 टन चीनी का निर्यात किया है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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