नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) सरकार रक्षा, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय सहित कुछ और मंत्रालयों को सोशल मीडिया मंचों को सामग्री (कंटेंट) हटाने के आदेश जारी करने का अधिकार देने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि अंतर-मंत्रालयी स्तर पर इसे लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इसे कब तक लागू किया जा सकता है।
वर्तमान में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सामग्री हटाने और अवरुद्ध करने के आदेशों के लिए नोडल मंत्रालय है। नामित मंत्रालयों के दायरे को बढ़ाने के इस कदम से भ्रामक, अवैध सामग्री और कृत्रिम मेधा से तैयार ‘डीपफेक’ पर तेजी से हटाने के आदेश जारी किए जा सकेंगे।
सूत्रों ने कहा कि रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ चर्चा चल रही है और एक बार निर्णय हो जाने के बाद, सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन के माध्यम से ये बदलाव किए जा सकते हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में ऑनलाइन सामग्री, वेबसाइट, ऐप या सोशल मीडिया पोस्ट तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार देती है।
केंद्र सरकार ने इस साल फरवरी में यूट्यूब और ‘एक्स’ जैसे सोशल मीडिया मंचों के लिए नियमों को सख्त किया। इसके तहत गैरकानूनी सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य कर दिया गया और सभी कृत्रिम मेधा आधारित सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना आवश्यक किया गया है।
ये नए नियम सोशल मीडिया मंचों पर भ्रामक, अश्लील और फर्जी सामग्री बनाने और प्रसारित करने के लिए कृत्रिम मेधा के बढ़ते दुरुपयोग और वास्तविक घटनाओं को गढ़ने के जवाब में आए थे। इसमें कृत्रिम मेधा सामग्री के साथ स्थायी ‘मेटाडेटा’ या पहचानकर्ता को संबद्ध करना अनिवार्य किया गया और कानून की नजर में गैरकानूनी मानी जाने वाली सामग्री पर प्रतिबंध लगाया गया।
साथ ही उपयोगकर्ता शिकायत निवारण की समयसीमा को भी कम किया गया।
सोशल मीडिया मंचों के लिए प्रतिबंधित सामग्री को हटाने की समयसीमा को घटाकर दो घंटे कर दिया गया। इसमें निजी अंगों को उजागर करने वाली सामग्री, पूर्ण या आंशिक नग्नता या यौन कृत्यों से संबंधित सामग्री शामिल हैं।
आईटी नियमों में फरवरी में में किए गए संशोधन का उद्देश्य तेजी से सामग्री हटाने, एआई द्वारा निर्मित सामग्री पर अनिवार्य लेबलिंग और गैरकानूनी कृत्रिम सामग्री के प्रचार और प्रसार को रोकना है।
भाषा रमण अजय
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