पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना पर विचार कर रही सरकार
पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना पर विचार कर रही सरकार
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय देश में पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना लाने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करना है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सातवें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा बाजार है।
उन्होंने कहा कि जुलाई के अंत तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सारंगी ने कहा, ‘हम देश में पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण के लिए सहायता योजना ला रहे हैं। हमारा प्रयास है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो घरेलू कंपनियों को पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे।’
उन्होंने कहा कि भारत 213 गीगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर मॉड्यूल विनिर्माता है। वहीं सौर सेल विनिर्माण क्षमता 32 गीगावाट तक पहुंच चुकी है।
सारंगी ने कहा कि अगले एक वर्ष में देश में सौर सेल विनिर्माण क्षमता 100 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। जून, 2028 तक कम से कम 80 गीगावाट इंगोट-वेफर विनिर्माण क्षमता विकसित होने की संभावना है।
सारंगी ने कहा कि पवन ऊर्जा उपकरण विनिर्माण में आज लगभग 85 प्रतिशत उत्पादन स्वदेशी हो चुका है और देश में इसकी विनिर्माण क्षमता 24 गीगावाट है।
उन्होंने बताया कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम लि. (सेकी) ने बृहस्पतिवार को चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए निविदा जारी की, जिसमें प्रत्येक समय खंड में 90 प्रतिशत बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि इस निविदा में खोजी गई दर 5.25 रुपये प्रति यूनिट रही, जो परमाणु ऊर्जा की लागत के लगभग बराबर है।
सारंगी ने कहा कि यह शुल्क दर्शाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी बन रही है और डेवलपर सौर, पवन तथा ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों को एकीकृत कर भरोसेमंद बिजली आपूर्ति करने में सक्षम हैं।
उन्होंने सीमा-पार ऊर्जा सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्रीय ऊर्जा एकीकरण के लिए केवल भौतिक अवसंरचना ही नहीं, बल्कि अनुकूल नियामकीय व्यवस्था भी आवश्यक है।
सारंगी ने ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अलग-अलग समय क्षेत्रों वाले देशों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत भूटान सहित पड़ोसी देशों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है और इस क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाषा योगेश रमण
रमण

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