सरकार जलाशयों में सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन देने पर कर रही विचार

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सरकार जलाशयों में सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन देने पर कर रही विचार

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 05:24 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 05:24 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष सारंगी ने सोमवार को कहा कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को पूरे देश में बढ़ाने के लिए फ्लोटिंग यानी जलाशयों में लगने वाले सोलर पैनल को प्रोत्साहन देने पर विचार कर रही है।

सारंगी ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई के सालाना व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत ने जो ऊर्जा बदलाव की परिकल्पना की है, उसमें सस्ती बिजली, उपलब्धता और पर्यावरण अनुकूल पहल पर जोर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, 2050 तक हमें 1,800 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और लगभग 2,000 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) की आवश्यकता होगी।

सारंगी ने कहा कि नीतिगत विकल्पों को खुला रखते हुए और नवीकरणीय ऊर्जा को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने वाली योजनाओं को तैयार करना ही आगे का रास्ता होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए। ये संयंत्र अभी केवल राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में ही लगाये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “भविष्य में, हम जलाशयों में लगने वाली सौर परियोजनाओं के लिए एक प्रोत्साहन व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। इससे ग्रिड स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार इन क्षेत्रों से हटकर देश के बाकी हिस्सों तक भी हो सकेगा।’’

सचिव ने देश में इनगॉट वेफर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मांग सृजित करने की प्रणाली और पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रोत्साहन व्यवस्था लाने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल करने के लिए आवश्यक ग्रिड स्थिरता के मुद्दे से निपटने के लिए भारत हरित ऊर्जा गलियारों में पर्याप्त निवेश करेगा। साथ ही उन्होंने देश की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को समर्थन देने के लिए पारेषण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत भी बतायी।

सारंगी ने कहा कि खासकर जब ऊर्जा औद्योगिक विकास और निवेश निर्णयों का एक प्रमुख निर्धारक बन रही है, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारत को बिजली की कीमतें कम करनी होंगी।

उन्होंने कहा कि लागत कम करने के लिए प्रौद्योगिकी नवोन्मेष, बेहतर दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में व्यापक निवेश की आवश्यकता होगी।

भाषा रमण अजय

अजय