नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए कुछ शुल्क लाभों के रूप में एकमुश्त विशेष राहत उपाय की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इन क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को सहारा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह छूट हालांकि केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी जिन्होंने 31 मार्च 2025 या उससे पहले वस्तुओं का उत्पादन शुरू कर दिया था। राजस्व विभाग ने 31 मार्च की अधिसूचना में यह जानकारी दी है।
इसमें कहा गया है, ‘‘ यह अधिसूचना एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।’’
इकाइयों को हालांकि यह भी साबित करना होगा कि जिन वस्तुओं पर इस छूट अधिसूचना के तहत लाभ का दावा किया गया है, वे निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करती हैं। साथ ही जिन वस्तुओं के लिए इस अधिसूचना के तहत छूट का दावा किया जाएगा वे एसईजेड की इकाई द्वारा निर्मित हों और उनमें कम से कम 20 प्रतिशत मूल्य संवर्धन हुआ हो।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का बजट पेश करते हुए एक एकमुश्त विशेष उपाय का प्रस्ताव किया था, ताकि एसईजेड की पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री करने की सुविधा मिल सके। यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार में व्यवधान के कारण एसईजेड की विनिर्माण इकाइयों की क्षमता उपयोग से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए लाया गया था।
उन्होंने कहा था कि ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित रहेगी।
यह इन क्षेत्रों की लंबे समय से मांग रही थी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वे अपने अतिरिक्त उत्पादन का निर्यात बढ़ाने में सक्षम नहीं थे। एसईजेड की इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए या घरेलू बाजार) में अपने उत्पाद बेचने की अनुमति है लेकिन इसके लिए उन्हें आयात शुल्क का भुगतान करना होता है।
इस फैसले पर लेखा एवं परामर्श कंपनी ग्रांट थॉर्नटन भारत के साझेदार एवं अप्रत्यक्ष कर तथा भारत निवेश सलाहकार विभाग के प्रमुख कृष्ण अरोड़ा ने कहा कि रियायती शुल्क विभिन्न क्षेत्रों में 6.5 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत के बीच है। इसमें मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) दोनों में कमी शामिल है जो उत्पाद के अनुसार अलग-अलग है।
उन्होंने कहा, ‘‘ फिलहाल यह लाभ 2026-27 के लिए है लेकिन अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए बढ़ाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।’’
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को कहा था कि कई इकाइयों के पास अतिरिक्त क्षमता है और यह घोषणा उन्हें रियायती शुल्क पर घरेलू बाजार में बिक्री करने में मदद करेगी, जिससे आयात कम होगा।
इन क्षेत्रों को सीमा शुल्क (व्यापार एवं आयात शुल्क) से संबंधित कानूनों के लिए विदेशी क्षेत्र माना जाता है और शुल्क-मुक्त घरेलू बिक्री पर प्रतिबंध रहता है।
एसईजेड में काम करने वाली कंपनियों को कच्चे माल और घटकों का आयात शुल्क-मुक्त करने की अनुमति होती है लेकिन इस शर्त के साथ कि उनसे तैयार वस्तुएं भारत से बाहर निर्यात की जाएंगी। हालांकि, वे लागू शुल्क का भुगतान कर घरेलू बाजार में भी बिक्री कर सकती हैं।
इन क्षेत्रों से कुल निर्यात 2024-25 में 7.37 प्रतिशत बढ़कर 172.27 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। देश में 276 चालू एसईजेड हैं जिनमें 6,279 इकाइयां कार्यरत हैं।
भाषा निहारिका मनीषा
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