अमेरिकी रिपोर्ट में भारत में ‘‘ऊंचे’’ आयात शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं का उल्लेख

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अमेरिकी रिपोर्ट में भारत में ‘‘ऊंचे’’ आयात शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं का उल्लेख

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 12:49 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 12:49 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) भारत कृषि उत्पादों, दवाओं एवं पेय पदार्थों सहित कई वस्तुओं पर ‘‘ऊंचे’’ आयात शुल्क लागू करता है और साथ ही देश में विभिन्न गैर-शुल्क बाधाएं भी मौजूद हैं। अमेरिका की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।

वहीं भारत हमेशा यह कहता रहा है कि उसके शुल्क विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की ओर से 31 मार्च को जारी 2026 राष्ट्रीय व्यापार अनुमान (एनटीई) रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूटीओ की निर्धारित दरों एवं वास्तविक लागू दरों के बीच बड़े अंतर के कारण भारत के पास कृषि तथा गैर-कृषि दोनों प्रकार के उत्पादों पर किसी भी समय शुल्क दरों में बदलाव करने का काफी लचीलापन है। इससे अमेरिकी कामगारों, किसानों, पशुपालकों एवं निर्यातकों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न होती है।

इस वार्षिक रिपोर्ट में उन देशों की प्रमुख नीतियों एवं प्रथाओं को सूचीबद्ध किया जाता है जो अमेरिकी निर्यात, निवेश और डिजिटल व्यापार को प्रभावित करती हैं। 2025 की रिपोर्ट में भी भारत में आयात शुल्क अधिक होने का आरोप लगाया गया था।

रिपोर्ट में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तथा नियामकीय चुनौतियों के कई पहलुओं का उल्लेख किया गया जिनमें शुल्क, गैर-शुल्क बाधाएं, बौद्धिक संपदा, सेवाएं, डिजिटल व्यापार तथा पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से अधिकतर मुद्दे पहले की रिपोर्ट की पुनरावृत्ति हैं और कुछ का समाधान पहले ही किया जा चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत कई वस्तुओं पर ऊंचे लागू शुल्क बनाए रखता है। इनमें वनस्पति तेल (45 प्रतिशत तक), सेब, मक्का व मोटरसाइकिल (50 प्रतिशत), मोटर वाहन व फूल (60 प्रतिशत), प्राकृतिक रबर (70 प्रतिशत), कॉफी, किशमिश व अखरोट (100 प्रतिशत) और पेय पदार्थ (बेवरेज) (150 प्रतिशत) शामिल हैं।

इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दवा तैयारियों (जिनमें जीवनरक्षक दवाएं और विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल तैयार दवाएं भी हैं) पर बहुत अधिक मूल सीमा शुल्क लगाता है।

रिपोर्ट के अनुसार ऊंची शुल्क दरें अन्य कृषि उत्पादों व प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के व्यापार में भी बड़ी बाधा है। इनमें मुर्गी उत्पाद, आलू, खट्टे फल, बादाम, पेकन, सेब, अंगूर, डिब्बाबंद आड़ू, चॉकलेट, बिस्कुट, जमे (फ्रोजन) हुए फ्रेंच फ्राइज और फास्ट-फूड रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले अन्य तैयार खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

इसमें कहा गया है कि भारत की कृषि उत्पादों पर शुल्क दरें डब्ल्यूटीओ में निर्धारित दुनिया में सबसे ऊंची दरों में से हैं जिनका औसत 113.1 प्रतिशत है और कुछ मामलों में यह 300 प्रतिशत तक जाती हैं। भारत कई कृषि उत्पादों पर अधिभार में नियमित रूप से बदलाव करता है।

रिपोर्ट में हालांकि यह भी कहा गया कि 2026 के बजट में भारत ने कई क्षेत्रों में कई उत्पादों पर लागू शुल्क कम किए हैं। इनमें जीवनरक्षक दवाएं, इलेक्ट्रिक वाहन और मोबाइल फोन बैटरी विनिर्माण के कच्चे माल एवं घटक, लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप, कोबाल्ट पाउडर, सीसा और जस्ता जैसे महत्वपूर्ण खनिज, कुछ इलेक्ट्रॉनिक घटक, मोबाइल फोन के कलपुर्जे और अन्य औद्योगिक कच्चे माल शामिल हैं।

गैर-शुल्क बाधाओं के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने कुछ वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध, सीमाएं, लाइसेंस की आवश्यकता, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ), सीमा शुल्क बाधाएं, चिकित्सा उपकरणों पर मूल्य नियंत्रण तथा उपकरणों के लिए अनिवार्य घरेलू परीक्षण व प्रमाणन आवश्यकताएं लागू की हैं।

इसमें कहा गया कि भारत द्वारा मात्रात्मक प्रतिबंधों को लागू करने की अपारदर्शी और अनिश्चित प्रकृति ने अमेरिकी निर्यातकों की बाजार तक पहुंच को प्रभावित किया है। अमेरिका और अन्य व्यापारिक साझेदार डब्ल्यूटीओ में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। आयात लाइसेंस लागू करने के लिए भारत नई वस्तुओं व पुरानी, पुनर्निर्मित, मरम्मत की गई या पुनः तैयार की गई वस्तुओं के बीच अंतर करता है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि भारत में शुल्क दरों की घोषणा वार्षिक बजट में की जाती है और बाद में राजपत्र में अधिसूचनाओं के माध्यम से समय-समय पर बदली जाती हैं, जिन पर सार्वजनिक टिप्पणी का अवसर नहीं होता।

इसके अनुसार, शुल्क दरों पर कई प्रकार की छूट भी लागू होती हैं जो उत्पाद, उपयोगकर्ता, उपयोग के उद्देश्य या किसी विशेष निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग होती हैं। इससे भारत की सीमा शुल्क प्रणाली जटिल हो जाती है और प्रशासनिक विवेक की गुंजाइश बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में डीटीएच (डायरेक्ट-टू-होम) टीवी सेवाओं के लिए घरेलू उपग्रहों को प्राथमिकता देने और स्थानीय स्तर पर इंटरनेट बंद करने की भारत की नीति को विदेशी व्यापार में बाधा करार दिया गया है।

इसमें कहा गया कि स्थानीय स्तर पर इंटरनेट बंद होने से सूचना एवं सेवाओं तक पहुंच सीमित होती है जिससे व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और डिजिटल सेवाओं से होने वाली आय बाधित होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय डीटीएच सेवाओं के लिए भारतीय उपग्रहों के उपयोग को प्राथमिकता देता है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा