Naxal Mukt CG: छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त होते ही गदगद हुए विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री शाह का जताया आभार, कहा- ‘अब शुरू होगा विकास का नया दौर’

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Naxal Mukt CG: छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त होते ही गदगद हुए विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री शाह का जताया आभार, कहा- 'अब शुरू होगा विकास का नया दौर'

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 11:48 AM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 11:48 AM IST

Naxal Mukt CG | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 31 मार्च 2026 को भारत नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हुआ
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने अमित शाह को ऐतिहासिक पत्र लिखकर आभार जताया
  • बस्तर में विकास, रोजगार और शिक्षा के नए अवसर खुलने की उम्मीद

रायपुर: Naxal Mukt CG केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को खत्म करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की थी और अब छत्तीसगढ़ समेत पूरा देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। इस संबंध में आज छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक एतिहासिक पत्र लिखा है और केंद्रीय मंत्री शाह का आभार जताया है।

Naxal Mukt CG उन्होंने पत्र में लिखा है कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है।

डॉ. रमन सिंह ने आगे लिखा है कि संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमने छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही।

उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे। हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया, लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते, लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा।

उन्होंने आगे लिखा, 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने इस घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है, लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी।

रमन सिंह ने आगे लिखा, आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले “लौह पुरुष” सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप “साध्य पुरुष” हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा।

अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

इन्हें भी पढ़े:-

भारत नक्सलवाद से कब मुक्त हुआ?

31 मार्च 2026 को भारत को नक्सलवाद मुक्त घोषित किया गया।

इस उपलब्धि का श्रेय किसे दिया गया है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति को इसका श्रेय दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म होने के बाद क्या बदलाव होंगे?

अब बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे।