नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि वह कोयले की मांग में किसी भी अप्रत्याशित उछाल से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश में कुल 21 करोड़ टन कोयले का भंडार है, जो लगभग 88 दिन के लिए पर्याप्त है।
इस वर्ष कोयले का उत्पादन और आपूर्ति खपत से अधिक रही है, जिससे ताप विद्युत संयंत्रों और कोयला खदानों में रिकॉर्ड स्टॉक जमा हो गया है।
गैर-विनियमित क्षेत्र को होने वाली आपूर्ति पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की खदानों पर कोयले का भंडार एक अप्रैल, 2025 को 10.67 करोड़ टन था, जो इस वर्ष नौ मार्च तक बढ़कर 12.13 करोड़ टन हो गया है।
इसके अतिरिक्त, सिंगरैनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की खदानों में लगभग 60 लाख टन, निजी (कैप्टिव) एवं वाणिज्यिक खदानों में 1.51 करोड़ टन और ढुलाई (ट्रांजिट) में लगभग 1.4 करोड़ टन कोयला उपलब्ध है। यह कुल 15.65 करोड़ टन का अब तक का सबसे बड़ा भंडार है।
यह स्टॉक बिजली संयंत्रों में नौ मार्च तक उपलब्ध लगभग 5.4 करोड़ टन कोयले के अतिरिक्त है, जो वर्तमान खपत दर के आधार पर लगभग 24 दिन के लिए पर्याप्त है।
कोयला मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘देश में उपलब्ध कुल कोयला भंडार लगभग 21 करोड़ टन है, जो करीब 88 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।’’
मंत्रालय ने कहा कि रेलवे के सहयोग से खदानों में भंडारण बढ़ाने और उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला उत्पादन उसी गति से जारी है।
कोयला मंत्रालय नीतिगत सुगमता, निरंतर निगरानी और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय के माध्यम से एक स्थिर वातावरण बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य कोयले की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध कामकाज को समर्थन देना और देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।
भाषा सुमित अजय
अजय