सरकार ने उर्वरक संयंत्रों को कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आपूर्ति की गारंटी दी
सरकार ने उर्वरक संयंत्रों को कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आपूर्ति की गारंटी दी
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) सरकार ने मंगलवार को कहा कि उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए ‘प्राथमिकता क्षेत्र-2’ में रखा गया है। इस कदम से उन्हें उनकी औसत प्राकृतिक गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा मिलने की गारंटी मिलती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिट्टी के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों का घरेलू उत्पादन, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति में आने वाली रुकावटों से प्रभावित न हो।
उर्वरक मंत्रालय ने नौ मार्च को ‘प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026’ में इस फैसले को अधिसूचित करते हुए बताया कि यह औसत, पिछले छह महीनों की खपत के आधार पर निकाला जाएगा।
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘इस उपाय का मकसद उर्वरक उत्पादन को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली रुकावटों, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों से बचाना है।’’
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यह चिंता जताई जा रही है कि पश्चिम एशिया में राजनीतिक अस्थिरता के कारण एलएनजी की खेप की आवाजाही बाधित हो सकती है और खरीफ की बुवाई के अहम मौसम से ठीक पहले उर्वरक उत्पादन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
मंगलवार को उर्वरक विभाग में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में सभी उर्वरक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने अपनी तैयारियों की स्थिति से अवगत कराया और सामने आ रही चुनौतियों को भी रेखांकित किया। बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।
उर्वरक विभाग ने बताया कि खरीफ के मौसम से पहले भारत का कुल उर्वरक भंडार बढ़कर 180.12 लाख टन तक पहुंच गया है। यह पिछले साल इसी तारीख को दर्ज किए गए 131.79 लाख टन के मुकाबले 36.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण डीएपी (25.17 लाख टन) और एनपीके-एनपीकेएस (56.30 लाख टन) का अभूतपूर्व रूप से इकट्ठा होना है। 10 मार्च तक उपलब्ध भंडार की स्थिति इस प्रकार है: यूरिया — 61.51 लाख टन; डीएपी — 25.17 लाख टन; एनपीके — 56.30 लाख टन; पोटाश — 12.90 लाख टन; एसएसपी — 24.24 लाख टन।
आयात के मोर्चे पर, सरकार ने फरवरी, 2026 तक 98 लाख टन यूरिया का आयात किया है, और अगले तीन महीनों में 17 लाख टन यूरिया और आने की प्रक्रिया में है। विभाग ने कहा कि कम खपत वाले समय के दौरान पहले से ही बड़ी मात्रा में स्टॉक जमा करने की आक्रामक रणनीति के कारण यह बड़ा बफर स्टॉक तैयार हुआ है; साथ ही, विभाग ने यह बताया कि समुद्री परिवहन में रुकावटों के बावजूद, किसानों को होने वाली घरेलू आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भाषा राजेश योगेश राजेश अजय
अजय

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