सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के पीएलआई योजना के ‘भविष्य’ पर कर रही है विचार

सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के पीएलआई योजना के ‘भविष्य’ पर कर रही है विचार

सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के पीएलआई योजना के ‘भविष्य’ पर कर रही है विचार
Modified Date: April 7, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: April 7, 2026 8:19 pm IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) खाद्य प्रसंस्करण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि सरकार इस बात का मूल्यांकन कर रही है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। इस योजना के तहत छह वर्षों में 22 राज्यों में 9,207 करोड़ रुपये का निवेश आया है।

यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 में 10,900 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ शुरू की गई थी और इस वित्त वर्ष में समाप्त होने वाली है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बताया कि इस योजना से प्रति वर्ष 34 लाख टन प्रसंस्करण क्षमता बढ़ी है और 3,29,000 नौकरियां पैदा हुई हैं।

संयुक्त सचिव डी. प्रवीण ने पत्रकारों से कहा, ‘‘फिलहाल, इस पर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मूल्यांकन किया जा रहा है। न तो कोई प्रस्ताव है और न ही उद्योग की ओर से कोई मांग है।’’

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पीएलआई योजना के तहत आने वाले उत्पादों की बिक्री 2019-20 के आधार वर्ष की तुलना में 10.58 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ी है, जबकि निर्यात बिक्री 7.41 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ी है। अधिकारी ने कठिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन आंकड़ों को काफी मजबूत बताया।

हालांकि, समुद्री उत्पाद क्षेत्र के प्रदर्शन ने कुल आंकड़ों पर नकारात्मक असर डाला है। वर्ष 2023-24 में आई भारी गिरावट का मुख्य कारण इक्वाडोर और वियतनाम से मिली कड़ी प्रतिस्पर्धा को माना गया है, खासकर अमेरिका में—जो समुद्री उत्पादों के लिए भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।

भारतीय कंपनियों ने इसका जवाब देते हुए ‘ब्रेडिड श्रिम्प’ (ब्रेडिंग झींगा मछली) जैसे अधिक मूल्य वाले उत्पादों की ओर रुख किया है। वर्ष 2019-20 के बाद से इस क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत की सालाना दर से सुधार देखा गया है।

समुद्री उत्पादों को छोड़कर, घरेलू बिक्री 11.57 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ी है और निर्यात 13.36 प्रतिशत से बढ़ा है।

योजना में शामिल प्रतिभागियों की प्रसंस्करण क्षमता, कार्यक्रम की निवेश अवधि के दौरान दोगुनी से भी अधिक हो गई। यह प्रति वर्ष 39 लाख टन से बढ़कर 73 लाख टन तक पहुंच गई।

यह योजना भारत के 14 उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन कार्यक्रमों में से एकमात्र ऐसी योजना है जो विशेष रूप से छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) का समर्थन करती है।

भारत का कुल प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात वर्ष 2019-20 के 6.2 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 10.09 अरब डॉलर हो गया। मंत्रालय ने इस वृद्धि का एक बड़ा श्रेय इस प्रोत्साहन कार्यक्रम को दिया है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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