सरकार ने कच्चे जूट की जमाखोरी रोकने के लिए भंडारण सीमा घटाकर शून्य की
सरकार ने कच्चे जूट की जमाखोरी रोकने के लिए भंडारण सीमा घटाकर शून्य की
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) सरकार ने सोमवार को कच्चे जूट की जमाखोरी रोकने और मिलों को पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापारियों और बैलरों (गांठ बनाने वालों) के लिए भंडारण सीमा घटाकर शून्य कर दी।
कपड़ा मंत्रालय ने बयान में कहा कि पिछले कुछ महीनों में कच्चे जूट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और इनके 2025-26 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर बने रहने को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
कीमतों में उतार-चढ़ाव और उपलब्धता को लेकर विभिन्न पक्षों ने चिंता जताई थी।
संशोधित नियमों के मुताबिक, जूट आयुक्त के साथ पंजीकृत और परिसर में बैलिंग प्रेस रखने वाले बैलरों को अपने पास मौजूद पूरा कच्चा जूट पांच मई, 2026 तक बेचना होगा और इसकी भौतिक आपूर्ति 15 मई तक पूरी करनी होगी।
बिना पंजीकरण वाले बैलरों और बिना बैलिंग प्रेस वाले स्टॉकिस्ट के लिए भंडारण सीमा शून्य कर दी गई है।
वहीं, जूट मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों को केवल 45 दिन की खपत के बराबर ही स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है।
मंत्रालय ने कहा कि कीमतों में अस्थिरता और कच्चे जूट की कमी से उद्योग और रोजगार पर असर पड़ सकता है। ये कदम आपूर्ति को स्थिर करने और किसानों, उद्योग तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं।
सभी संबंधित इकाइयों को जूट स्मार्ट पोर्टल पर हर पखवाड़े अपने स्टॉक की जानकारी देनी होगी। अधिकारियों को परिसर और रिकॉर्ड की जांच करने तथा आदेश के उल्लंघन पर अतिरिक्त स्टॉक जब्त करने का अधिकार दिया गया है।
इसके अलावा, राज्यों से भी जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग मांगा गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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