सरकार ने सीएएफई-3 मानदंड अधिसूचित किए, छोटी कारों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य
सरकार ने सीएएफई-3 मानदंड अधिसूचित किए, छोटी कारों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य
नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) सरकार ने यात्री वाहनों के लिए कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई) मानदंडों के तीसरे चरण को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत हल्की कारों के लिए अपेक्षाकृत नरम ईंधन दक्षता लक्ष्य तय किए गए हैं, जबकि भारी वाहनों को ईंधन दक्षता में अधिक सुधार करना होगा।
देश में सबसे अधिक छोटी कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया को संशोधित वजन आधारित व्यवस्था से सबसे अधिक लाभ होने की संभावना है, क्योंकि सितंबर, 2025 के मसौदे में निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में हल्के वाहनों के लिए अपेक्षाकृत नरम ईंधन दक्षता लक्ष्य रखे गए हैं।
बिजली मंत्रालय ने यात्री वाहनों के लिए कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई-3) मानदंडों के तीसरे चरण को अधिसूचित किया है। ये मानदंड एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च, 2032 तक प्रभावी रहेंगे।
नए मानदंड भारत में बिक्री के लिए निर्मित या आयात किए जाने वाले नए यात्री वाहनों पर लागू होंगे।
मंगलवार देर रात अधिसूचित मानदंडों के तहत छोटे वाहनों के लिए स्पष्ट रियायत देने के बजाय संशोधित लक्ष्य को इस तरह तय किया गया है कि व्यवस्था वजन के अनुरूप अधिक संतुलित हो। इससे छोटे और बड़े वाहनों के साथ अलग-अलग व्यवहार को लेकर वाहन विनिर्माताओं के बीच लंबे समय से चल रही बहस समाप्त हो गई है।
मौजूदा मानदंडों के तहत 1,082 किलोग्राम के संदर्भ वजन को नए सीएएफई मानदंडों में बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है। यह करीब 13.6 प्रतिशत की वृद्धि है और यात्री वाहन बेड़े की बदलती विशेषताओं को दर्शाती है।
नए मानदंड विनिर्माताओं को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, वैकल्पिक ईंधन और अन्य नवोन्मेषी समाधान को अपनाने की सुविधा देते हैं।
मोटर वाहन उद्योग इसको लेकर दो समूहों में बंटा हुआ था। एक समूह छोटे वाहनों के लिए कुछ विशेष रियायत देने की मांग कर रहा था, जबकि दूसरा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बड़े वाहन के लिए लाभ चाहता था।
टाटा मोटर्स समेत कुछ वाहन विनिर्माताओं ने पहले वजन और किफायती होने के आधार पर छोटे वाहनों के लिए किसी भी तरह की नरमी का विरोध किया था, जबकि मारुति सुजुकी इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों का तर्क था कि नए मानदंडों का उद्देश्य बड़े वाहनों की ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन कम करना है।
सितंबर, 2025 के मसौदे में 909 किलोग्राम तक वजन वाली पेट्रोल कारों के घोषित कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में तीन ग्राम प्रति किलोमीटर की अतिरिक्त कटौती का प्रस्ताव था। ये कारें 1,200 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली और चार मीटर से अधिक लंबी नहीं होनी थीं।
अंतिम मानदंडों में यह अलग रियायत हटा दी गई है। इसके बजाय वजन आधारित लक्ष्यों में अंतर को कम किया गया है, जिससे सितंबर, 2025 के मसौदे की तुलना में हल्के वाहनों को अधिक राहत मिलती है।
नए सीएएफई मानदंडों में पांच साल में ईंधन दक्षता में 16 प्रतिशत से अधिक सुधार का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, ईंधन खपत के मानक को 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटाकर 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर किया गया है। यह इस अवधि में करीब 16.7 प्रतिशत सुधार दर्शाता है।
नए मानदंडों में वाहन विनिर्माताओं को अनुपालन के लिए कई विकल्प दिए गए हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड वाहन, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन, वैकल्पिक ईंधन और ईंधन बचाने वाली प्रौद्योगिकियों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।
इस व्यवस्था में कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (सीएनएफ) की शुरुआत के जरिये एथनॉल मिश्रित पेट्रोल, जैव ईंधन और सीबीजी समेत नवीकरणीय और कम-कार्बन वाले ईंधन के योगदान को मान्यता दी गई है।
इससे वाहन विनिर्माताओं को वाहन की दक्षता को बेहतर करने तथा विद्युतीकरण के साथ-साथ अपने पूरे वाहन बेड़े के सीएएफई प्रदर्शन में सुधार के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलता है।
मान्यता प्राप्त ईंधन-बचत प्रौद्योगिकियों की सूची में भी काफी विस्तार किया गया है और इनकी संख्या चार से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। इससे वाहन विनिर्माताओं को मंजूर ईंधन-बचत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनके लिए मान्यता हासिल करने की अधिक सुविधा मिलेगी।
स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नए नियम बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी), रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों (आरईईवी), प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (पीएचईवी), मजबूत हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (एसएचईवी) और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ‘‘सुपर क्रेडिट’’ की सुविधा देते हैं। इससे वैकल्पिक ईंधन वाले मॉडल बनाने पर विनिर्माताओं के लिए बेड़े के उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करना आसान होगा।
संशोधित नियमों के तहत कुल बेड़े के औसत उत्सर्जन की गणना करते समय वैकल्पिक ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और हाइब्रिड वाहनों को मात्रा संबंधी छूट गुणक मिलेंगे, जिन्हें आमतौर पर ‘‘सुपर क्रेडिट’’ कहा जाता है।
नए मानदंड वाहन विनिर्माताओं को स्वच्छ और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल तथा बाजार में उनकी पहुंच बढ़ाने में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देते हैं।
अनुपालन को आसान बनाने और परिचालन में अधिक मजबूती देने के लिए वाहन विनिर्माता निर्धारित दो साल या तीन साल की अनुपालन अवधि में अपनी अनिवार्यताओं को पूरा करने का विकल्प चुन सकते हैं।
ऐसे वाहन विनिर्माता जिनके अनुपालन में कमी रह जाएगी, वे आगे ले जाने के लिए पात्र क्रेडिट का इस्तेमाल कर सकते हैं, अन्य वाहन विनिर्माताओं के साथ क्रेडिट का आदान-प्रदान या कारोबार कर सकते हैं अथवा ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा संचालित क्रेडिट खरीद व्यवस्था के तहत क्रेडिट खरीद सकते हैं।
वहीं जिन वाहन विनिर्माताओं की सालाना बिक्री 1,000 इकाइयों से कम है, उन्हें औसत बेड़े से जुड़ी अनिवार्यताओं से छूट रहेगी।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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