सरकार ने जीआईसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी ओएफएस के जरिये 3,000 करोड़ रुपये में बेची

सरकार ने जीआईसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी ओएफएस के जरिये 3,000 करोड़ रुपये में बेची

सरकार ने जीआईसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी ओएफएस के जरिये 3,000 करोड़ रुपये में बेची
Modified Date: June 17, 2026 / 07:41 pm IST
Published Date: June 17, 2026 7:41 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र की पुनर्बीमा कंपनी जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जीआईसी-री) में अपनी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी को निवेशकों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बीच बेच दिया।

इस हिस्सेदारी को बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये बेचा गया। इससे सरकार को लगभग 3,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में अब तक पांच सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश से सरकार को करीब 16,000 करोड़ रुपये की राशि मिल चुकी है।

गैर-खुदरा निवेशकों ने मंगलवार को इस ओएफएस के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं। खुदरा निवेशकों के लिए यह निर्गम बुधवार को खुला था।

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने कहा कि जीआईसी-री में हिस्सेदारी बिक्री के लिए लाए गए ओएफएस को निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और आधार निर्गम एवं ग्रीन-शू विकल्प दोनों को पूर्ण अभिदान मिला।

सरकार ने 352 रुपये प्रति शेयर के आधार मूल्य पर दो चरणों में यह निर्गम पेश किया था। इसमें दो प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीन प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी का ग्रीन-शू विकल्प भी शामिल था। कुल मिलाकर यह पांच प्रतिशत हिस्सेदारी रही।

ओएफएस के लिए घोषित न्यूनतम मूल्य सोमवार के बंद भाव के मुकाबले 9.36 प्रतिशत कम था। इस बीच, बीएसई पर जीआईसी के शेयर 7.65 प्रतिशत गिरकर 358.65 रुपये पर बंद हुए।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इसके पहले सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री से 13,389 करोड़ रुपये जुटाए थे। इनमें कोल इंडिया, एनएचपीसी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एनएलसी इंडिया शामिल हैं।

सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश से वित्त वर्ष 2026-27 में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का लक्ष्य रखा है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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