नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) विकसित देशों के साथ कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर के बाद सरकार इनका अधिकतम लाभ उठाने के लिए ‘एफटीए इस्तेमाल योजना’ पर काम कर रही है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी के अनुसार, 2021 से अबतक भारत ने मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), यूरोपीय संघ (ईयू), ब्रिटेन और अमेरिका के साथ एफटीए को अंतिम रूप दिया है।
ये मुक्त व्यापार समझौते 38 देशों के साथ किए गए हैं, जिनका वैश्विक आयात मूल्य 12,000 अरब डॉलर बैठता है। इन समझौतों के तहत भारतीय कृषि, वस्त्र एवं परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और दवा क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिली है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग संगठनों, कारोबारियों और निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) के साथ कई बैठकें कर एफटीए के बेहतर के उपायों पर चर्चा की है। उन्होंने उद्योग जगत से इन समझौतों का लाभ उठाकर निर्यात और घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने का आह्वान किया है।
अधिकारी ने बताया कि मंत्री ने चार मई को प्रमुख अधिकारियों और मुख्य वार्ताकारों के साथ बैठक कर मुक्त व्यापार समझौतों की प्रगति की समीक्षा की। इसके बाद सात मई को भारतीय कृषि और मत्स्य उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (एसपीएस) संबंधी मंजूरियां हासिल करने के लिए रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और सभी संबंधित मंत्रालयों को भी शामिल किया गया है। भारतीय दूतावास आयातक देशों में एफटीए के प्रति जागरूकता बढ़ाने, नए अवसरों की जानकारी देने और गैर-शुल्क बाधाओं के समाधान में तेजी लाने का काम करेंगे। वहीं संबंधित मंत्रालय पर्याप्त उत्पादन, वैश्विक मानकों के अनुरूप व्यवस्था और कारोबार सुगमता सुनिश्चित करेंगे।
यह पहल ऐसे समय की जा रही है जब भारत आने वाले वर्षों में माल और सेवा निर्यात को बढ़ाकर 2,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
देश का वस्तु एवं सेवा निर्यात 2025-26 में 4.6 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो 2024-25 में 825.26 अरब डॉलर था। माल निर्यात 0.93 प्रतिशत बढ़कर 441.78 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 8.71 प्रतिशत बढ़कर 421.32 अरब डॉलर रहा है।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के पूर्व निदेशक शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि भारतीय कारोबारियों को एफटीए को केवल शुल्क कटौती तक सीमित समझौते के रूप में नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन समझौतों का वास्तविक महत्व कंपनियों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और भारत को भरोसेमंद व्यापार साझेदार के रूप में स्थापित करने में है।
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