सरकार का बजट में मछली पालन और पशुधन उपायों के साथ ग्रामीण विविधीकरण पर जोर

सरकार का बजट में मछली पालन और पशुधन उपायों के साथ ग्रामीण विविधीकरण पर जोर

सरकार का बजट में मछली पालन और पशुधन उपायों के साथ ग्रामीण विविधीकरण पर जोर
Modified Date: February 1, 2026 / 05:21 pm IST
Published Date: February 1, 2026 5:21 pm IST

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण आय में विविधता लाने और पारंपरिक कृषि से बाहर रोजगार के अवसर पैदा करने के मकसद से रविवार को पशुपालन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्रों के लिए कई पहल की बजट 2026-27 में घोषणा की।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान 1,51,853 करोड़ रुपये से 7.12 प्रतिशत ज़्यादा है।

अपना लगातार नौवां बजट पेश करते हुए, सीतारमण ने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के अपने नजरिये को विकसित भारत की ओर ले जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए उत्पादकता बढ़ाने और उद्यमशीलता के ज़रिये किसानों की आय बढ़ाने को लक्षित प्रयासों की ज़रूरत है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों पर खास ध्यान दिया जाएगा।’’ उन्होंने ग्रामीण आय में विविधता लाने और पारंपरिक खेती से हटकर रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए कई उपायों की घोषणा की।

मछली पालन के लिए, भारतीय जहाज़ों द्वारा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और गहरे समुद्र में पकड़ी गई मछलियों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। ऐसी मछलियों को विदेशी बंदरगाहों पर उतारने को सामान का निर्यात माना जाएगा।

सीतारमण ने कहा, ‘मछली पकड़ने, पारगमन और ट्रांसशिपमेंट के दौरान दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि इन उपायों का मकसद भारतीय मछुआरों को देश के समुद्री क्षेत्र से बाहर समुद्री संसाधनों के आर्थिक मूल्य का पूरा फायदा उठाने में मदद करना है।

सरकार ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान निर्यात किए गए समुद्री खाद्य उत्पादों के विशिष्ट कच्चे माल के लिए लदान मूल्य (एफओबी) सीमा एक प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है।

देश के भीतर मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, सरकार 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास करेगी और तटीय इलाकों में मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करेगी, जिससे स्टार्टअप, महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों और मछली किसान उत्पादक संगठनों के जरिये बाजार संपर्क कायम किया जा सके।

उन्होंने 20,000 से अधिक पशु-चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऋण-सम्बद्ध पूंजी सब्सिडी योजना का प्रस्ताव भी रखा। यह योजना पशु चिकित्सा महाविद्यालय, अस्पताल, निजी कॉलेज, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा देगी।

सीतारमण ने कहा कि खेती की पैदावार में विविधता लाने, उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय बढ़ाने और रोज़गार के नए मौके बनाने के लिए, ‘‘हम अपने तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी ज़्यादा कीमत वाली फसलों को समर्थन करेंगे। पूर्वोत्तर में अगर के पेड़ और पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे मेवों को भी समर्थन किया जाएगा।’’

मंत्री ने नारियल उगाने वाले मुख्य राज्यों में पुराने और कम पैदावार वाले पेड़ों की जगह नई किस्मों के पेड़ लगाने के मकसद से एक नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव दिया।

तटीय किसानों के लिए नारियल संवर्धन योजना भी प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत पुराने एवं गैर-उत्पादक वृक्षों की जगह नई किस्मों को लगाया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि एक करोड़ किसानों समेत करीब तीन करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं और भारत दुनिया में नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक है।

सरकार भारतीय काजू और कोको कार्यक्रम के जरिये उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और 2030 तक उन्हें विश्वस्तरीय प्रीमियम ब्रांड में बदलने की योजना बना रही है।

इसके अतिरिक्त, चंदन की खेती और उत्पाद प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर भारत की सांस्कृतिक एवं सामाजिक धरोहर से जुड़े भारतीय चंदन पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव भी इस बजट में रखा गया है।

पहाड़ी क्षेत्रों में पुराने बागों के पुनरुत्थान और अखरोट, बादाम एवं चिलगोजा (पाइन नट्स) की उच्च-घनत्व वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना भी पेश की गई है, जिसमें युवा सहभागिता से मूल्य संवर्धन पर खास ध्यान रहेगा।

तेंदू पत्तों पर, स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) घटाकर दो प्रतिशत कर दिया जाएगा।

इन उपायों का मकसद आय की निश्चितता बढ़ाना, नकदी प्रवाह के दबाव को कम करना और एक ऐसा कर-व्यापार पारिस्थिकी तंत्र बनाना है जो भारत के कृषि और समुद्री क्षेत्रों की परिचालनगत असलियत को दिखाए – जिसमें यह सुनिश्चित हो कि देश को खाना खिलाने वालों पर बेवजह के वित्तीय बोझ न पड़ें।

बजट दस्तावेज में कहा गया, ‘‘अगर खेती खराब होती है, तो बाकी कुछ को भी सही होने का मौका नहीं मिलेगा।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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