सरकार आरईसी के साथ विलय के बाद पीएफसी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के पक्ष मेंः अधिकारी

सरकार आरईसी के साथ विलय के बाद पीएफसी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के पक्ष मेंः अधिकारी

सरकार आरईसी के साथ विलय के बाद पीएफसी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के पक्ष मेंः अधिकारी
Modified Date: April 7, 2026 / 04:37 pm IST
Published Date: April 7, 2026 4:37 pm IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) सरकार सार्वजनिक स्वामित्व वाली कंपनियों पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लिमिटेड के प्रस्तावित विलय के बाद संयुक्त इकाई में कम-से-कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा कि सरकार विलय के बाद भी इस इकाई को ‘सरकारी कंपनी’ के रूप में बनाए रखना चाहती है, जिसके लिए उसे 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखनी जरूरी है। इस मकसद को हासिल करने के लिए तरजीही शेयर जारी करने या सरकार को नई इक्विटी जारी करने जैसे विकल्पों पर चर्चा चल रही है।

कंपनी अधिनियम के मुताबिक, ‘सरकारी कंपनी’ में चुकता शेयर पूंजी का कम-से-कम 51 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के पास होता है। इसमें ऐसी कंपनी भी शामिल होती है, जो किसी सरकारी कंपनी की अनुषंगी हो।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पीएफसी और आरईसी के पुनर्गठन की घोषणा की थी, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का पैमाना बढ़ाया जा सके और दक्षता में सुधार हो।

अधिकारी ने इस पर कहा, “सरकार की मंशा संयुक्त इकाई में बहुलांश हिस्सेदारी बनाए रखने की है, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी सरकारी एनबीएफसी होगी और इसकी रणनीतिक भूमिका अहम होगी।”

फिलहाल सरकार की हिस्सेदारी पीएफसी में 55.99 प्रतिशत और आरईसी में 52.63 प्रतिशत है। शेष हिस्सेदारी सार्वजनिक निवेशकों के पास है।

अधिकारी ने कहा कि विलय के बाद सरकार की हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए पूंजीगत संरचना में बदलाव के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की दोनों कंपनियां बिजली क्षेत्र में उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को वित्त मुहैया कराती हैं।

प्रस्तावित विलय से संयुक्त इकाई की बड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण की क्षमता बढ़ेगी और जोखिम उठाने की क्षमता में भी सुधार होगा। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा और पारेषण जैसे क्षेत्रों में पोर्टफोलियो विविधीकरण की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा में मजबूती आएगी।

आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2025 तक पीएफसी का एकीकृत ऋण पोर्टफोलियो 11.51 लाख करोड़ रुपये था, जबकि आरईसी का ऋण पोर्टफोलियो 5.82 लाख करोड़ रुपये रहा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में