सरकार ने ब्लूटूथ-आधारित संदेश ऐप ‘बिटचैट’ को हटाने का गिटहब को दिया आदेश: जैक डोर्सी

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सरकार ने ब्लूटूथ-आधारित संदेश ऐप 'बिटचैट' को हटाने का गिटहब को दिया आदेश: जैक डोर्सी

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 04:48 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 04:48 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) गृह मंत्रालय के साइबर अपराध प्रकोष्ठ भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने माइक्रोसॉफ्ट की अनुषंगी कंपनी गिटहब को ब्लूटूथ-आधारित संदेश ऐप ‘बिटचैट’ हटाने का आदेश दिया है। यह जानकारी एक नोटिस से मिली।

ऐप के डेवलपर और ट्विटर के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जैक डोर्सी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर नोटिस की प्रति साझा करते हुए लिखा, ‘‘भारत सरकार को ‘बिटचैट’ जैसी प्रौद्योगिकी पसंद नहीं है और वह इसे हटाना चाहती है।’’

इस संबंध में आई4सी को भेजे गए सवाल का तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।

आई4सी ने अपने नोटिस में कहा कि यह ऐप नेटवर्क प्रतिबंधों के दौरान भी संचार की सुविधा देता है और इसका दुरुपयोग राष्ट्रविरोधी तत्वों, आतंकवादी संगठनों, संगठित आपराधिक गिरोहों तथा साइबर अपराधियों द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचने एवं कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद संपर्क बनाए रखने के लिए किया जा सकता है।

‘बिटचैट’ का उल्लेख करते हुए आई4सी ने कहा कि गिटहब मंच पर उपलब्ध यह ऐप कानून के तहत प्रतिबंधित है या किसी गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

आई4सी ने कहा कि उसने ऐसे कई ऐप की पहचान की है जो मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट संपर्क या केंद्रीकृत सर्वर पर निर्भर हुए बिना ब्लूटूथ ‘मेश नेटवर्क’ के जरिये विकेंद्रीकृत एक उपकरण से दूसरे उपकरण में संदेश सेवा उपलब्ध कराते हैं।

नोटिस के अनुसार, यह ऐप अनिवार्य पंजीकरण, मोबाइल नंबर सत्यापन या संदेशों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड रखे बिना गुमनाम संचार की सुविधा देता है। इसकी तकनीकी संरचना के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए वैध निगरानी, उपयोगकर्ता की पहचान और जांच करना काफी कठिन हो जाता है।

यह नोटिस ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कई प्रदर्शनकारियों को ब्लूटूथ-आधारित संदेश ऐप का इस्तेमाल करते देखा गया।

आई4सी के अनुसार, चूंकि संदेश पास-पास मौजूद उपकरणों के बीच विकेंद्रीकृत ‘मेश नेटवर्क’ के जरिये सीधे भेजे जाते हैं, इसलिए इस मंच का इस्तेमाल वैध निगरानी से बचने, गुमनाम समन्वय करने और सार्वजनिक अशांति, दंगों, आतंकवाद, संगठित अपराध या इंटरनेट बंदी जैसी परिस्थितियों में लगाए गए कानूनी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है।

नोटिस में कहा गया कि खुफिया सूचनाओं से संकेत मिले हैं कि ऐसे विकेंद्रीकृत संचार मंचों का इस्तेमाल गैरकानूनी जमावड़े, हिंसक प्रदर्शन, भ्रामक सूचना फैलाने, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने, आपराधिक साजिशों और भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा तथा लोक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों के समन्वय में किया जा सकता है।

आई4सी ने कहा कि केंद्रीकृत सेवा प्रदाता नहीं होने के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए जांच के दौरान ग्राहक संबंधी जानकारी, संचार रिकॉर्ड या समय पर आवश्यक सहयोग प्राप्त करना भी कठिन हो जाता है।

नोटिस में कहा गया, ‘‘ ऐप की ऐसी संरचना, जो नेटवर्क प्रतिबंधों के दौरान भी संचार की सुविधा देती है, राष्ट्रविरोधी तत्वों, आतंकवादी संगठनों, संगठित आपराधिक गिरोहों और साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग का गंभीर जोखिम पैदा करती है।’’

गिटहब को भेजे गए नोटिस में आई4सी ने कहा कि यह ऐप सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 43, 84बी व 84सी और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61 को धारा 196 तथा 197 के साथ पढ़े जाने पर इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

भाषा निहारिका रमण

रमण