सियोल, 24 जुलाई (एपी) संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने इजराइल की आपत्तियों के बावजूद शुक्रवार को वेस्ट बैंक के एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल और दक्षिणी लेबनान के कई किलों को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल करने के पक्ष में मतदान किया।
इजराइल ने समिति से इन प्रस्तावों को खारिज करने की अपील की थी।
दक्षिण कोरिया में हुई संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने कुछ दिन पहले एक अपील में समिति से वेस्ट बैंक के छोटे शहर सेबास्तिया और लेबनान के किलों को सूची में शामिल करने के प्रयासों को खारिज करने को कहा था।
इजराइल ने इन नामांकनों को ‘सांस्कृतिक विरासत के हथियार के रूप में इस्तेमाल’ बताया था।
बुसान में हुई बैठक में यूनेस्को समिति के सदस्यों ने आपात आधार पर नामांकनों की समीक्षा करने के बाद सेबास्तिया और लेबनान के माउंट अमेल क्षेत्र के पांच किलों को विश्व धरोहर सूची तथा संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची, दोनों में शामिल करने का फैसला किया।
सेबास्तिया, इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में नेबलस से करीब 10 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में एक पहाड़ी शहर है। इस शहर को विद्वान प्राचीन समरिया के रूप में पहचानते हैं।
समरिया, बाइबिल में वर्णित इजराइल साम्राज्य की राजधानी थी।
इस क्षेत्र के पुरातात्विक अवशेष लौह युग, रोमन, बाइजेंटाइन और इस्लामी काल तक फैले हुए हैं।
यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, ईसाई और इस्लामी परंपरा में माना जाता है कि जॉन द बैपटिस्ट को यहीं दफनाया गया था।
यह मान्यता ऐसे समय में दी गयी है, जब इजराइल इस स्थल के आसपास बड़े भू-भाग को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
इजराइल, फलस्तीन को देश के रूप में मान्यता नहीं देता है।
यूनेस्को के विवरण के अनुसार, माउंट अमेल क्षेत्र के पांच किलों को उनकी मिश्रित वास्तुकला विरासत के लिए मान्यता दी गई है।
इन पांच किलों में क्रूसेडर, अय्यूबी, मामलुक और स्थानीय स्थापत्य प्रभावों का मेल दिखाई देता है, जो लगभग नौ सदियों में किलेबंद वास्तुकला के विकास को दर्शाता है।
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में फलस्तीन प्रतिनिधिमंडल पर यूनेस्को में ‘शत्रुतापूर्ण और एकतरफा अभियान’ चलाने का आरोप लगाया।
मंत्रालय ने कहा कि फलस्तीन पक्ष ने सेबास्तिया को गलत तरीके से आपात स्थिति का सामना कर रहे क्षेत्र के रूप में पेश किया।
इजरायल ने इस प्रयास को एक राजनीतिक कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ‘इस स्थल के गहरे और पुख्ता रूप से दर्ज यहूदी व ईसाई इतिहास को मिटाना’ है।
एपी जितेंद्र नरेश
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