नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) मच्छरों और कीटों से होने वाली बीमारियों से लड़ने और निवारक स्वास्थ्य देखभाल सेवा को मजबूत करने के लिए जीएसटी परिषद को घरेलू कीटनाशकों पर लगने वाले कर को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने पर विचार करना चाहिए। ईवाई-एचआईसीए ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही।
रिपोर्ट के अनुसार लिक्विड वेपोराइजर, कॉइल और एरोसोल जैसे घरेलू कीटनाशक भारत के निवारक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से घरेलू स्तर पर जहां इन बीमारियों से सुरक्षा अभी भी असमान है।
ईवाई और होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (एचआईसीए) की इस संयुक्त रिपोर्ट में इस बात की पड़ताल की गई है कि वर्तमान 18 प्रतिशत की जीएसटी दर इन उत्पादों की वहनीयता, पहुंच और उपयोग को खासकर संवेदनशील और उच्च जोखिम वाली आबादी के बीच किस तरह प्रभावित करती है।
रिपोर्ट में इन उत्पादों पर कर को अन्य आवश्यक स्वच्छता और स्वास्थ्य-सुरक्षा उत्पादों की तर्ज पर पांच प्रतिशत करने का तर्क दिया गया है।
ईवाई इंडिया के पार्टनर और राष्ट्रीय प्रमुख (अप्रत्यक्ष कर) बिपिन सप्रा ने कहा, ”जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत कई स्वास्थ्य आधारित एफएमसीजी और दवाओं को कम कर वाले स्लैब में रखा गया है। ऐसे में घरेलू कीटनाशकों पर मौजूदा कर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उनके महत्व के अनुरूप नहीं दिखता है।”
एचआईसीए के निदेशक जयंत देशपांडे ने कहा कि घरेलू कीटनाशकों की जीएसटी दर को पांच प्रतिशत तक युक्तिसंगत बनाने से वहनीयता में सुधार होगा, घटिया उत्पादों के प्रसार पर रोक लगेगी और क्षेत्र के औपचारिककरण को बढ़ावा मिलेगा।
भाषा पाण्डेय प्रेम
प्रेम