चंडीगढ़, 27 सितंबर (भाषा) हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने वित्तीय संस्थानों से ग्रामीण महिला उद्यमियों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ऋण प्रक्रिया को सुगम बनाने, ‘गारंटी’ की जरूरत कम करने और स्वयं सहायता समूहों तथा सूक्ष्म उद्यमों को भागीदार बनाने का आह्वान किया है।
घोष ने कहा कि बैंकों को गांवों और छोटे शहरों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचानी चाहिए, ताकि महिला उद्यमियों को संस्थागत ऋण हासिल करने में परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता के साथ बाजार तक पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनाई, खेती, हस्तशिल्प या अन्य उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को ऐसे डिजिटल और भौतिक बाजार उपलब्ध कराए जाने चाहिए, जहां उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके और वे गांवों तथा छोटे शहरों से बाहर भी ग्राहकों तक पहुंच सकें।
राज्यपाल ने शनिवार को यहां ‘महिला अंतरराष्ट्रीय उद्यमिता शिखर सम्मेलन’ (वाइज) 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।
सम्मेलन का आयोजन ‘कनफेडरेशन ऑफ वुमेन एंटरप्रेन्योर्स’ (सीओडब्ल्यूई) इंडिया ने किया था।
उन्होंने उद्योग संगठनों और ई-कॉमर्स मंचों से ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह विशेष स्थान उपलब्ध कराने का भी आह्वान किया।
सीओडब्ल्यूई इंडिया को सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार एमएसएमई को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ के रूप में देखा है।
उन्होंने कहा कि जब छोटे उद्यम, खासकर महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम, आगे बढ़ते हैं तो इसका लाभ परिवारों, समुदायों और पूरे देश को मिलता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया और आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य वित्त तक पहुंच बढ़ाना और उद्यम शुरू करने की आकांक्षा रखने वाले लोगों के लिए अवसर पैदा करना है।
राज्यपाल ने कहा कि सम्मेलन का विषय ग्रामीण ताकत को डिजिटल प्रौद्योगिकी से जोड़कर महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने से जुड़ा है।
भाषा
योगेश अजय
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