इलेक्ट्रॉनिक्स मांग, नीतिगत समर्थन से आगे बढ़ रहा है भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र : बीसीजी

Ads

इलेक्ट्रॉनिक्स मांग, नीतिगत समर्थन से आगे बढ़ रहा है भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र : बीसीजी

  •  
  • Publish Date - September 27, 2026 / 03:51 PM IST,
    Updated On - September 27, 2026 / 03:51 PM IST

नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती खपत, प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये सरकारी समर्थन और वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में आए बदलाव से घरेलू चिप विनिर्माण परिवेश के लिए मजबूत अवसर तैयार हुए हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के प्रबंध निदेशक एवं भागीदार अंकुश वढेरा ने यह बात कही है।

कृत्रिम मेधा (एआई) सुरक्षा पर जारी बहस के संबंध में उन्होंने कहा कि जिम्मेदार एआई विकास को लेकर हालिया चर्चाएं चीजों को नियंत्रण में रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र की मांग धीमी होने की कोई वजह नहीं है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हालिया चर्चाएं और बातचीत अच्छे गति नियंत्रक की तरह हैं, लेकिन ये कोई रुकने का संकेत नहीं है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह सिलसिला रुकने वाला है।’’

वढेरा को उम्मीद है कि एआई का उछाल जीपीयू, कंप्यूटिंग क्षमता और मेमोरी की मांग को आगे बढ़ाता रहेगा। उनका मानना है कि सेमीकंडक्टर और एआई का यह आपसी जुड़ाव और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि कई कारकों का तालमेल यहां फैब (चिप विनिर्माण संयंत्र) और असेंबली इकाइयों से आगे बढ़कर व्यापक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में निवेश को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने इसे भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए सबसे बेहतरीन समय करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास दुनिया की आबादी का पांचवां हिस्सा है। दुनिया तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है और हम जो कुछ भी उपयोग करते हैं, उसमें चिप होते हैं। किसी न किसी को तो ये चिप बनाने ही होंगे। इसलिए यदि हम दुनिया के कुल चिप के पांचवें हिस्से का उपयोग करने जा रहे हैं, तो हमें उन्हें भारत में ही क्यों नहीं बनाना चाहिए?”

वढेरा ने कहा कि भारत ने कई घोषित परियोजनाओं और कई संयंत्रों के अब वाणिज्यिक उत्पादन में आने के साथ घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता विकसित करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय