भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की मुख्य बातें
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की मुख्य बातें
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी होने की मंगलवार को घोषणा की गई। इस समझौते के अगले वर्ष लागू होने की संभावना है।
इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं –
* भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा यूरोपीय संघ के दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने से यह वैश्विक जीडीपी (सकल घेरलू उत्पाद) का 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई है।
* भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में तरजीही प्रवेश मिलेगा जिससे वृद्धि की अपार संभावनाएं खुलती हैं।
* सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए नए अवसर खुलेंगे और महिलाओं, कारीगरों, युवाओं एवं पेशेवरों के लिए रोजगार सृजित होंगे।
* कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत तरजीही पहुंच से भारी लाभ होने की संभावना है।
* समझौते के लागू होने के पहले दिन करीब 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर शुल्क 10 प्रतिशत से घटकर शून्य होगा।
* मोटर वाहन क्षेत्र के लिए, एक सुनियोजित एवं सावधानीपूर्वक तैयार किया गया कोटा-आधारित उदारीकरण पैकेज शामिल।
* इससे न केवल यूरोपीय संघ के मोटर वाहन विनिर्माताओं को भारत में उच्च मूल्य श्रेणियों में अपने मॉडल पेश करने की अनुमति मिलेगी बल्कि भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ और भारत से निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।
* भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा।
* यूरोपीय संघ में पारस्परिक बाजार पहुंच से भारत में बने मोटर वाहनों के लिए भी अवसर खुलेंगे।
* भारत ने घरेलू प्राथमिकताओं के साथ निर्यात वृद्धि को संतुलित करते हुए, दूग्ध, अनाज, मुर्गी पालन, सोयामील, कुछ फलों और सब्जियों सहित संवेदनशील क्षेत्रों की विवेकपूर्ण तरीके से रक्षा की है।
* एफटीए मजबूत नियामक सहयोग, अधिक पारदर्शिता एवं सुव्यवस्थित सीमा शुल्क, स्वच्छता तथा पादप स्वच्छता (एसपीएस) प्रक्रियाओं और व्यापार में प्रौद्योगिकी बाधाओं से संबंधित नियमों के माध्यम से गैर-शुल्क बाधाओं से निपटने के उपाय प्रदान करता है।
* भविष्य के लिए तैयार परिवहन ढांचा कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करता है।
* कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) प्रावधानों के माध्यम से प्रतिबद्धताएं हासिल की गई हैं जिनमें मजबूती को बढ़ाने वाला एक दूरदर्शी सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का आश्वासन शामिल है।
* बाजार तक निश्चित पहुंच, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार, डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना और सुगम आवागमन भारत के सेवा निर्यात को बढ़ावा देगा।
* भारत को यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों जैसे आईटी/आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाएं और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच हासिल होगी।
* यूरोपीय संघ को भारत द्वारा प्रस्तावित 102 उप-क्षेत्रों तक पहुंच प्राप्त होगी।
* इससे यूरोपीय संघ से भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी सेवाएं और निवेश आएगा जिसके परिणामस्वरूप पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था बनेगी।
* मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों दिशाओं में अल्पकालिक, अस्थायी एवं व्यावसायिक यात्रा को शामिल करते हुए व्यावसायिक परिवहन के लिए एक सुगम व पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करता है।
* यूरोपीय संघ और भारत एक दूसरे को अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरण (आईसीटी) और व्यावसायिक आगंतुकों के लिए परिवहन प्रतिबद्धताएं प्रदान कर रहे हैं। साथ ही आईसीटी के आश्रितों और परिवार के सदस्यों के लिए प्रवेश और कार्य अधिकार भी प्रदान कर रहे हैं।
* यूरोपीय संघ ने संविदात्मक सेवा आपूर्तिकर्ताओं (सीएसएस) के लिए 37 क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों और स्वतंत्र पेशेवरों (आईपी) के लिए 17 क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं भी पेश की हैं।
* भारत ने पांच साल की अवधि में सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर रचनात्मक रूप से विचार-विमर्श करने के लिए एक ढांचा भी हासिल किया है।
* भारत ने यूरोपीय संघ के उन देशों में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को स्वदेशी लाइसेंस के तहत काम करने की अनुमति सुनिश्चित की है जहां पारंपरिक चिकित्सकीय पद्धतियों का विनियमन नहीं है।
* मुक्त व्यापार समझौता नवाचार को बढ़ावा देने और सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को सुरक्षित करने के लिए सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
* यूरोपीय संघ भारत का 22वां मुक्त व्यापार समझौता भागीदार बन गया है।
भाषा निहारिका रमण
रमण


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