एआई से अप्रासंगिक नहीं होंगे इंसान, मजबूत सुरक्षा उपाय करना जरूरीः सिस्को अध्यक्ष

एआई से अप्रासंगिक नहीं होंगे इंसान, मजबूत सुरक्षा उपाय करना जरूरीः सिस्को अध्यक्ष

एआई से अप्रासंगिक नहीं होंगे इंसान, मजबूत सुरक्षा उपाय करना जरूरीः सिस्को अध्यक्ष
Modified Date: February 20, 2026 / 09:56 pm IST
Published Date: February 20, 2026 9:56 pm IST

(विजय जोशी)

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) की दुनिया के शीर्ष रणनीतिज्ञों में से एक और प्रौद्योगिकी कंपनी सिस्को के अध्यक्ष जीतू पटेल ने शुक्रवार को कहा कि एआई मनुष्य के काम को खत्म नहीं करेगा, लेकिन इसे भरोसेमंद और मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ विकसित किया जाना चाहिए।

पटेल ने कहा कि यदि एआई को जिम्मेदारी के साथ विकसित किया जाए तो यह मानवीय क्षमताओं को बढ़ा सकता है।

सिस्को के अध्यक्ष और मुख्य उत्पाद अधिकारी पटेल ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ खास बातचीत में कहा, ‘मैं इस धारणा को खारिज करता हूं कि कृत्रिम मेधा की प्रगति का मतलब समाज में मानवीय योगदान का खत्म होना है।’

उन्होंने कहा कि यह प्रौद्योगिकी मशीन स्तर पर काम करने के साथ गहराई से मानव-केंद्रित भी रहनी चाहिए।

पटेल ने कहा कि आम लोगों को चैटबॉट जैसे उपकरण ज्यादा दिखाई देते हैं, लेकिन सिस्को का मुख्य काम एआई के कामकाज के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इसमें तेज और स्थिर नेटवर्क शामिल हैं, जो जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) को जोड़ता है। इसके अलावा एआई के गलत इस्तेमाल को रोकने वाले सुरक्षा तंत्र हैं, निगरानी उपकरण हैं और ऐसे डेटा मंच हैं जो एआई एजेंट्स को सही जानकारी एवं संदर्भ देते हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम एआई युग के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा हैं।’

पटेल ने बताया कि पर्याप्त बुनियादी ढांचे का अभाव, लोगों का भरोसा न होना और सही संदर्भ वाला डेटा न होना ये ऐसी तीन समस्याएं हैं जो एआई के व्यापक उपयोग को धीमा कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर एआई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, नेटवर्क बैंडविड्थ या डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है।

नेटवर्क बैंडविड्थ किसी कनेक्शन के माध्यम से एक निश्चित समय में स्थानांतरित किए जा सकने वाले अधिकतम डेटा की मात्रा है।

इसके साथ ही पटेल ने कहा कि लोगों का भरोसा एआई को लेकर अभी कमजोर है। उन्होंने कहा, ‘अगर लोग इन प्रणालियों पर भरोसा नहीं करेंगे, तो वे इन्हें इस्तेमाल नहीं करेंगे।’

उन्होंने एआई प्रणाली को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए सुरक्षा नियम और मॉडल सत्यापन की आवश्यकता पर जोर दिया।

पटेल ने मशीन-जनित डेटा की बढ़ती अहमियत पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि अब वैश्विक डेटा वृद्धि का 55 प्रतिशत हिस्सा मशीनों से आता है और इसे संभालने के लिए सिस्को का स्प्लंक मंच मदद करता है।

पटेल के अनुसार, एआई अब केवल सवालों के जवाब देने वाले ‘चैटबॉट्स’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वायत्त एजेंट की ओर बढ़ रहा है, जो निर्णय लेने और कार्रवाई करने में सक्षम हैं। यह बदलाव एआई के उपयोग और इसके प्रभाव को बहुत अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।

पटेल ने कहा कि एआई उद्योग अब अपने विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें यह केवल सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट्स से आगे बढ़कर निर्णय लेने और कार्रवाई करने में सक्षम स्वायत्त एजेंट की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव से सुरक्षा उपायों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा, ‘कल्पना कीजिए कि मैं किसी एजेंट को कुछ करने के लिए कहता हूं, और वह एजेंट गलत कार्रवाई करता है तो समाज पर इसके दूरगामी परिणाम कहीं अधिक गंभीर होंगे।’

पटेल ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के बारे में कहा कि इसमें लगभग 2,50,000 प्रतिभागियों ने भाग लिया और यह आयोजन अपेक्षाओं से कहीं अधिक सफल रहा। उन्होंने कहा कि यह भारत की एआई महत्वाकांक्षा के स्तर को दर्शाता है।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम


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