दूसरी छमाही में नजर आएगा अमेरिकी शुल्क का प्रभावः वाहन कलपुर्जा निकाय

दूसरी छमाही में नजर आएगा अमेरिकी शुल्क का प्रभावः वाहन कलपुर्जा निकाय

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 07:21 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 07:21 PM IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) अमेरिकी शुल्क का भारत के वाहन कलपुर्जा उद्योग पर असर संभवतः चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महसूस होगा जबकि नए अनुबंधों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वाहन कलपुर्जा उद्योग निकाय एक्मा ने बुधवार को यह अनुमान जताया।

वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एक्मा) ने कहा कि भारतीय वाहन कलपुर्जा उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-सितंबर छमाही में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.56 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह एक साल पहले की समान अवधि के 3.33 लाख करोड़ रुपये के कारोबार से अधिक है।

पहली छमाही में उद्योग का निर्यात 9.3 प्रतिशत बढ़कर 12.1 अरब डॉलर हो गया जबकि आयात लगभग 12.5 प्रतिशत बढ़कर 12.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस तरह व्यापार घाटा 18 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 15 करोड़ डॉलर का अधिशेष था।

भारत से निर्यात किए जाने वाले वाहन कलपुर्जा उत्पादों पर अमेरिका में फिलहाल 25 प्रतिशत कर लागू है।

एक्मा के महानिदेशक विनी मेहता ने कहा, “सिंतबर में भारतीय उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाए जाने का प्रभाव दूसरी छमाही में अधिक महसूस किया जाएगा। यह उद्योग कम मार्जिन पर काम करता है लिहाजा इस तरह के शुल्क प्रभाव को झेल पाना संभव नहीं है।”

उन्होंने कहा कि अप्रैल-सितंबर में अमेरिकी निर्यात अपेक्षाकृत स्थिर रहा। भारतीय कंपनियों ने इस अवधि में अमेरिका को 3.64 अरब डॉलर के कलपुर्जा निर्यात किए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह राशि 3.67 अरब डॉलर थी।

एक्मा का नामित अध्यक्ष श्रीराम विजी ने कहा कि आने वाले समय में अमेरिका को निर्यात थोड़े अनिश्चित लग हो रहे हैं और नए अनुबंधों को लेकर असमंजस है, जबकि मौजूदा आपूर्ति शृंखला कुछ समय के लिए जारी रहेगी।

उद्योग निकाय ने कहा कि अप्रैल-सितंबर में निर्यात वृद्धि महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई, जिसमें आपूर्ति शृंखला से जुड़ी बाधाएं, कच्चे माल की लागत में दबाव और प्रमुख बाजारों में मांग में कमजोरी शामिल हैं।

एक्मा के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि दूसरी छमाही में खुदरा भावना में सुधार, हाल की नीतिगत पहल, मौसमी मांग और बुनियादी ढांचा आधारित गतिविधियों से मांग बढ़ने की संभावना है। जीएसटी ढांचे के तहत चुनिंदा वाहन श्रेणियों पर कटौती कलपुर्जा परिवेश के लिए सकारात्मक असर डाल सकती है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण