टाइगर ग्लोबल पर पूंजीगत लाभ पर कर निर्धारण को आयकर विभाग पूरा करेगाः सूत्र
टाइगर ग्लोबल पर पूंजीगत लाभ पर कर निर्धारण को आयकर विभाग पूरा करेगाः सूत्र
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) आयकर विभाग वर्ष 2018 में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने के दौरान अमेरिकी निवेश फर्म टाइगर ग्लोबल को हुए पूंजीगत लाभ पर कर निर्धारण की प्रक्रिया अब पूरी करेगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि टाइगर ग्लोबल से जुड़े मामले में कानूनी स्तर पर अंतिम फैसला आने तक कर आकलन की कार्रवाई रोककर रखी गई थी। लेकिन उच्चतम न्यायालय की तरफ से अनुकूल फैसला आ जाने के बाद कर निर्धारण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सभी कर विवादों को ‘अत्यधिक कार्रवाई’ या ‘कर आतंकवाद’ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि कई मामले कानून के विकसित हो रहे क्षेत्रों में व्याख्या के वास्तविक मतभेदों से जुड़े होते हैं।
गौरतलब है कि 2018 में अमेरिकी खुदरा दिग्गज वॉलमार्ट इंक ने फ्लिपकार्ट में नियंत्रक हिस्सेदारी करीब 16 अरब अमेरिकी डॉलर के वैश्विक सौदे में खरीदी थी। इस सौदे के तहत टाइगर ग्लोबल की मॉरीशस स्थित तीन इकाइयों ने फ्लिपकार्ट में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेची थी, जिससे उन्हें 14,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली और खासा पूंजीगत लाभ हुआ।
लेनदेन के समय टाइगर ग्लोबल ने इस पूंजीगत लाभ पर भारत में कर देनदारी न होने का दावा करते हुए ‘स्रोत पर कर कटौती’ (टीडीएस) से छूट मांगी थी।
आयकर विभाग की प्रशासनिक संस्था सीबीडीटी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टीडीएस का आकलन करने वाले अधिकारी ने प्रथम दृष्टया जांच के बाद कम दर पर कर कटौती के प्रमाणपत्र दिए, क्योंकि कंपनी का नियंत्रण मॉरीशस में होने का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। इस आधार पर लगभग 967.52 करोड़ रुपये का टीडीएस काटा गया था।
सूत्रों ने कहा, ‘यह कर कटौती अंतिम कर निर्धारण नहीं होकर एक अंतरिम व्यवस्था थी, क्योंकि कर-योग्यता ही विवादित थी।’
लेकिन उच्चतम न्यायालय के बृहस्पतिवार को आए फैसले के बाद अब कर आकलन अधिकारी न्यायिक निर्देशों के अनुरूप कर निर्धारण पूरा करेंगे।
इसके साथ ही टीडीएस के रूप में रोकी गई करीब 967.52 करोड़ रुपये की रिफंड राशि का निपटारा भी आकलन और उसके बाद की मांग प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने 2024 के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए आयकर विभाग के पक्ष में निर्णय दिया है। उसने कहा कि टाइगर ग्लोबल की मॉरीशस इकाइयों द्वारा फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयरों की बिक्री ‘इनडायरेक्ट ट्रांसफर’ के तहत भारत में कर योग्य है।
उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि भारत-मॉरीशस कर संधि में संशोधन कर संधि के दुरुपयोग को रोकने के लिए किए गए थे।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण

Facebook


