गैस मांग बढ़ाने को सिर्फ एलएनजी आयात क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं, और कदम उठाने होंगे : रिपोर्ट
गैस मांग बढ़ाने को सिर्फ एलएनजी आयात क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं, और कदम उठाने होंगे : रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) भारत में प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक मांग बढ़ाने के लिए केवल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ-साथ गैस पाइपलाइन और वितरण नेटवर्क का विस्तार, गैस आधारित उद्योगों में निवेश तथा बाजार, नियमन और मूल्य निर्धारण प्रणाली में व्यापक सुधार भी जरूरी होंगे। अंतरराष्ट्रीय गैस संघ (आईजीयू) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने एलएनजी री-गैसीफिकेशन टर्मिनल की क्षमता तो बढ़ाई है, लेकिन गैस के परिवहन और वितरण से जुड़ा बुनियादी ढांचा उसी गति से विकसित नहीं हो पाया है। इससे देश की गैस खपत बढ़ाने की क्षमता पर सीधा असर पड़ा है।
आईजीयू ने हालिया होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने भारत की गैस आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को उजागर किया है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस और एलपीजी की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। घरेलू उत्पादन कुल गैस मांग का लगभग 50-52 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है, जबकि शेष आवश्यकता कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस से एलएनजी आयात से पूरी होती है। तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के मामले में भी देश अपनी 60-65 प्रतिशत जरूरत आयात के जरिये पूरी करता है।
रिपोर्ट कहती है कि भारत का अधिकांश एलएनजी और एलपीजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। हालिया पश्चिम एशिया तनाव के दौरान इस मार्ग पर आई बाधाओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
हालांकि, दीर्घकाल में स्थिति बेहतर होने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक के शेष वर्षों में वैश्विक स्तर पर नई एलएनजी निर्यात परियोजनाओं के शुरू होने से आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमतों पर दबाव पड़ेगा और भारत के लिए गैस का उपयोग अधिक किफायती हो सकेगा।
आईजीयू ने सुझाव दिया है कि भारत को एलएनजी टर्मिनल तक अधिक खुली पहुंच, प्रणाली प्रवेश शुल्क में सुधार और बाजार के उदारीकरण जैसे कदम उठाने चाहिए, ताकि खरीदार कम कीमतों का लाभ उठा सकें और आयात टर्मिनल का बेहतर उपयोग हो सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि प्राकृतिक गैस को कोयले का प्रभावी विकल्प बनाना है तो उत्तर, पूर्व और मध्य भारत में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना होगा। प्रतिस्पर्धी परिवहन शुल्क और मजबूत पारेषण नेटवर्क से गैस की लागत कम होगी और नए उपभोक्ताओं को जोड़ना आसान होगा।
आईजीयू का मानना है कि केवल थोक गैस सस्ते दाम पर उपलब्ध होने से खपत नहीं बढ़ेगी। इसके लिए बुनियादी ढांचे में निवेश, गैस मूल्य निर्धारण प्रणाली में सुधार, व्यावसायिक अनुबंधों को सरल बनाने और व्यापक बाजार सुधारों की भी आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट कहती है कि खाड़ी क्षेत्र के संकट ने एलएनजी आयात की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन विभिन्न देशों से आयात के स्रोत बढ़ाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भाषा अजय अजय
अजय

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