नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) भारत ने चीन, जापान और रूस से कुछ ‘हॉट रोल्ड स्टील’ उत्पादों के सस्ते आयात के खिलाफ डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। वाणिज्य मंत्रालय की एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई।
यह जांच जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू विजयनगर मेटालिक्स लिमिटेड और जिंदल स्टील ओडिशा लिमिटेड की ओर से दायर आवेदन के बाद शुरू की गई है।
आवेदकों का आरोप है कि चीन, जापान और रूस से निर्यात किए जा रहे मिश्रधातु या गैर-मिश्रधातु इस्पात के ‘हॉट रोल्ड फ्लैट उत्पाद’ डंपिंग कीमतों पर भारत में आयात किए जा रहे हैं, जिससे घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान हो रहा है।
इन उत्पादों का उपयोग मोटर वाहनों, तेल एवं गैस पाइपलाइन/अन्वेषण, कोल्ड रोल्ड स्टील उत्पाद, पाइप विनिर्माण, सामान्य इंजीनियरिंग एवं फैब्रिकेशन, निर्माण, पूंजीगत सामान व सीमेंट, उर्वरक और रिफाइनरी उद्योगों के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों तथा क्रेन जैसी भारी मशीनों में किया जाता है।
व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) जांच के तहत 2022 से 2025 तक के आयात आंकड़ों पर गौर करेगा।
डीजीटीआर ने कहा कि उसके प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चला है कि इन उत्पादों का निर्यात उनकी सामान्य कीमत से काफी कम मूल्य पर किया जा रहा है। सामान्य मूल्य और निर्यात मूल्य के बीच का अंतर (जिसे डंपिंग मार्जिन कहा जाता है) न्यूनतम सीमा से अधिक और इन देशों के निर्यात के मामले में काफी अधिक पाया गया है।
उसने कहा कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य हैं कि इन देशों के निर्यातक भारतीय बाजार में इस उत्पाद की डंपिंग कर रहे हैं।
डीजीटीआर ने कहा, ‘‘ आवेदकों द्वारा प्रस्तुत विधिवत प्रमाणित आवेदन तथा उत्पाद की डंपिंग संबंधी प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर प्राधिकरण डंपिंग रोधी जांच शुरू करता है।’’
एक अलग अधिसूचना में डीजीटीआर ने कहा कि वह चीन और मलेशिया से आयातित डायलाइजर की कथित डंपिंग की भी जांच कर रहा है।
‘डायलाइजर’ एक डिस्पोजेबल चिकित्सकीय उपकरण है, जो कृत्रिम किडनी की तरह काम करता है और मरीज के रक्त से यूरिया, अतिरिक्त तरल पदार्थ और विषैले तत्वों को निकालने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
यह जीवनरक्षक चिकित्सकीय उपभोग्य सामग्री है और हीमोडायलिसिस प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा है।
यदि यह पाया जाता है कि डंपिंग से घरेलू उद्योग को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, तो डीजीटीआर इन उत्पादों के आयात पर शुल्क लगाने की सिफारिश करेगा।
इन शुल्कों को लागू करने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय लेता है।
डंपिंग रोधी जांच यह पता लगाने के लिए की जाती है कि क्या सस्ते आयात में वृद्धि से घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा है।
इसके जवाब में देश, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बहुपक्षीय ढांचे के तहत डंपिंग रोधी शुल्क लगाते हैं। इसका उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना और घरेलू उत्पादकों तथा विदेशी उत्पादकों एवं निर्यातकों के बीच समान प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार करना है।
भारत और ये सभी देश डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं।
डीजीटीआर ने हाल ही में चीन और कुछ अन्य देशों से आयातित कई अन्य उत्पादों के खिलाफ भी इसी तरह की जांच शुरू की है।
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और चीन की अत्यधिक औद्योगिक उत्पादन क्षमता के कारण भारत में सस्ते चीनी उत्पादों की डंपिंग का जोखिम बढ़ गया है।
भाषा निहारिका रमण
रमण