नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) उर्वरक मंत्रालय ने शुक्रवार को देश में हरित यूरिया के उत्पादन के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए कदम उठाया। इसके लिए मंत्रालय ने अंशधारकों के साथ ‘रुचि पत्र’ (ईओआई) से पहले एक बैठक की, ताकि उस योजना पर चर्चा की जा सके जो अभी बातचीत के चरण में है।
इस बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव के.के. पाठक ने की, जो सरकारी कंपनी पीडीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं।
इससे पहले, पूरी मूल्य श्रृंखला में बाजार की दिलचस्पी और तकनीकी तैयारी का पता लगाने के लिए ईओआई जारी किया गया था।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पूरी मूल्य श्रृंखला से संभावित कंपनियों की भारी भागीदारी… ऑनलाइन और ऑफलाइन…इस बात का साफ संकेत है कि वे इस पहल को जल्द ही हकीकत में बदलने के लिए बहुत उत्सुक हैं।’’
रूपरेखा में कई मंत्रालयों से वित्तीय सहायता की परिकल्पना की गई है, हालांकि आवंटन अभी प्रस्ताव के रूप में हैं और उन्हें औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) को हरित ऊर्जा बुनियादी ढांचा की गति को तेज करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये का संभावित बजट आवंटित किया गया है। खाद विभाग (डीओएफ) को हरित अमोनिया को राष्ट्रीय खाद निर्माण श्रृंखला में शामिल करने के लिए एक संस्थागत और बाजार-समानता ढांचा बनाने का काम सौंपा गया है, हालांकि इसकी भूमिका के वित्तीय पहलुओं पर अभी काम किया जाना बाकी है।
बैठक में एक मुख्य चिंता हरित और पारंपरिक ग्रे अमोनिया के बीच लागत के अंतर को लेकर जताई गई। इसे दूर करने के लिए, रूपरेखा में अलग-अलग सब्सिडी व्यवस्था का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (सेकी) एक मध्यस्थ के रूप में काम करेगा। यह उत्पादकों से ग्रीन अमोनिया खरीदेगा और इसे घरेलू खाद कंपनियों को ग्रे अमोनिया के बराबर कीमत पर आपूर्ति करेगा।
भारत अभी हर साल लगभग एक करोड़ टन यूरिया का आयात करता है और कई घरेलू संयंत्र 30 साल से ज्यादा पुराने हैं, जिससे नई क्षमता की जरूरत का पता चलता है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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