भारत एआई क्षेत्र में अगुवा बनने की मजबूत स्थिति मेंः ऋषि सुनक

भारत एआई क्षेत्र में अगुवा बनने की मजबूत स्थिति मेंः ऋषि सुनक

भारत एआई क्षेत्र में अगुवा बनने की मजबूत स्थिति मेंः ऋषि सुनक
Modified Date: February 18, 2026 / 10:03 pm IST
Published Date: February 18, 2026 10:03 pm IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार को कहा कि भारत अपने प्रतिभा भंडार और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के बल पर कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में अगुवा बनने और समाज में इसके व्यापक अनुपालन का उदाहरण पेश करने की स्थिति में है।

सुनक ने यह टिप्पणी यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान एक संवाद सत्र में की। इस सत्र का आयोजन कार्नेगी इंडिया ने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन एवं अन्य साझेदारों के साथ किया था।

इस दौरान सुनक ने कहा कि एआई को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। उन्होंने कहा, “एआई को लेकर भारत में जबर्दस्त आशावाद और भरोसा है, जबकि पश्चिमी देशों में इस समय प्रमुख भावना चिंता की है। इस भरोसे के अंतर को पाटना केवल प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि एक नीतिगत चुनौती है।”

ब्रिटिश प्रधानमंत्री रहते समय नवंबर, 2023 में बकिंघमशायर में आयोजित ‘एआई सेफ्टी समिट’ का उल्लेख करते हुए सुनक ने कहा कि शुरुआती संदेह के बावजूद उस सम्मेलन से ‘एआई सुरक्षा संस्थानों’ की स्थापना जैसी ठोस पहल सामने आई, जो इस प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन में मददगार हैं।

उन्होंने कहा कि एआई पर वैश्विक बहस तकनीक से आगे बढ़कर रणनीति पर केंद्रित हो गई है। उन्होंने कहा, “मुद्दा अब यह नहीं है कि ये उपकरण क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि देश इनके साथ क्या करना चुनते हैं।”

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए एआई कोई हाशिये का विषय नहीं, बल्कि सरकार की केंद्रीय जिम्मेदारी बन चुका है।

सुनक ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व केवल आविष्कार पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि प्रौद्योगिकी को किस तरह लागू किया जाता है।

उन्होंने कहा, “गहरी प्रतिभा संपदा, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी के प्रति अत्यंत समर्थक जनमानस के सहयोग से व्यापक स्तर पर एआई की स्वीकार्यता देखते हुए, मेरा मत है कि भारत एआई में नेतृत्व करने और समाज में इसके व्यापक उपयोग एवं तैनाती का प्रदर्शन करने की मजबूत स्थिति में है।”

उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैश्विक रैंकिंग का हवाला देते हुए कहा कि एआई प्रतिस्पर्धात्मकता में भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो उसकी रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

हालांकि, सुनक ने कहा कि एआई में भरोसे की ‘जंग’ सार्वजनिक क्षेत्र में ही जीती या हारी जाएगी। जब नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, अधिक प्रभावी सरकारी सेवाएं और तेज प्रतिक्रिया समय का अनुभव होगा, तब एआई पर भरोसा मजबूत होगा।

उन्होंने नीति निर्माताओं से सार्वजनिक क्षेत्र में एआई के प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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