Vande Bharat: छत्तीसगढ़ में होली पर नो ड्राई डे का फैसला, आबकारी विभाग के आदेश ने बढ़ाय सियासी पारा, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
Vande Bharat: छत्तीसगढ़ में होली पर नो ड्राई डे का फैसला, आबकारी विभाग के आदेश ने बढ़ाय सियासी पारा, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
- होली में खुली रहेगी छत्तीसगढ़ की शराब दुकाने।
- आबकारी विभाग ने जारी किया आदेश।
- आदेश जारी होने के बाद बढ़ा सियासी पारा।
Vande Bharat: रायपुर: आबकारी विभाग के एक फरमान के बाद छत्तीसगढ़ में शराब प्रेमियों में खुशी का माहौल है। छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब की दुकान खुली रहेंगी। सरकार का दावा है कि इससे होली के दिन शराब के नाम पर होने वाली कालाबाजारी कम होगी। जबकि कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को केवल राजस्व कमाई की पड़ी है। (Vande Bharat) संस्कृति और जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं है।
छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की मांग समय समय पर उठती रही है, लेकिन अब शराब की दुकानें होली के दिन ही बंद नहीं रहेंगी। नई नीति के तहत होली के दिन भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी। शराब निषेध दिवसों की सूची में संशोधन कर होली को हटा दिया गया है। अब सिर्फ 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर और 18 दिसंबर को ही शराब दुकानें बंद रहेंगी। होली, मुहर्रम और महात्मा गांधी की पुण्यतिथि यानी 30 जनवरी को सूची से हटा दिया गया है। कांग्रेस ने शराब दुकानों के बाहर प्रदर्शन भी किया और राज्य सरकार के फैसले का तीखा विरोध भी किया। अब होली के दिन शराब (Vande Bharat) दुकानें खोलने काे लेकर भी कांग्रेस हमलावर नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इस फैसले पर तीखा हमला करते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा आम जनता की सहूलियत और सुविधा के लिए सरकार होती है। सरकार आम जनता की चिंता कर रही है, जो अच्छा है और बेहतर हो, वह सरकार कर रही है। अवैध और नक़ली शराब न बिके इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया है। कांग्रेस सरकार में तो एक शराब दुकान में दो काउंटर होते थे। कांग्रेस शराब के मुद्दे पर बोले तो अच्छा है।
Vande Bharat: छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध शराब बिक्री रोकने और राजस्व में वृद्धि की लिहाज से फैसला लिया है। (Vande Bharat) फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि होली जैसे त्योहारों पर मांग तो अधिक होती है, लेकिन आपूर्ति नहीं हाेने की वजह से कालाबाजारी भी होती है। हालांकि इसका दूसरा पक्ष यह भी है। त्योहार पर शराब की आसानी से उपलब्धता दुर्घटनाओं और अपराध को भी न्योता दे सकती है। इसलिए सियासत से अलग विभाग को फैसले पर विचार करने की जरूरत है।
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