जयपुर, 22 जनवरी (भाषा) नीति आयोग का कहना है कि असंगठित कबाड़ (स्क्रैप) पुनर्चक्रण में खराब प्रसंस्करण क्षमता और अक्षमताओं के कारण भारत हजारों करोड़ रुपये के पुनर्चक्रण कारोबार के अवसर खो रहा है।
आयोग ने अलग-अलग रिपोर्टों में देश के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) उद्योग की क्षमता का आकलन किया है। इसमें ई-कचरा, बेकार टायर, लिथियम-आयन बैटरी और बेकार हो चुके वाहन की रिसाइक्लिंग शामिल है।
ई-कचरे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) का प्रवाह 51,000 करोड़ रुपये का है जिसमें से 60 प्रतिशत निकाला जा सकता है। हालांकि मौजूदा कचरा ‘रिकवरी सिस्टम’ इसमें से केवल 18 प्रतिशत ही निकाल पा रहे हैं जिससे इस संगठित क्षेत्र में खराब प्रसंस्काण और अक्षमताओं के कारण बड़ा अवसर हाथ से निकल जाता है।
बेकार टायरों की श्रेणी में रिपोर्ट में कहा गया है कि पुनर्चक्रण किए गए उत्पादों के लिए मानकों की कमी के कारण देश को 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
आयोग ने सर्कुलर यानी संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था में ‘रीसाइक्लिंग’ क्षेत्र की क्षमता के साथ-साथ चुनौतियों का भी जिक्र किया और सरकार के लिए कुछ उपायों की सिफारिश की। ये रिपोर्टें यहां इंटरनेशनल मटेरियल रीसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस (आईएमआरसी-2026) में जारी की गईं।
मैटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एमएआरआईए) द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम बृहस्पतिवार को समाप्त हुआ।
नीति आयोग के कार्यक्रम प्रमुख (हरित बदलाव) प्रियव्रत भाटी द्वारा जारी इन रिपोर्टों में कमजोर कार्यबल प्रणालियों और गुणवत्ता मानकों का अभाव जैसी कमियों का जिक्र किया गया है।
एक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत वर्तमान में सालाना लगभग 62 लाख टन ई-कचरा उत्पन्न करता है और यह आंकड़ा 2030 तक तेजी से बढ़कर 1.4 करोड़ होने का अनुमान है जबकि औपचारिक रीसाइक्लिंग क्षमता लगभग 20 लाख टन तक सीमित है और कुल ई-कचरे का केवल 10 प्रतिशत ही अधिकृत चैनलों के माध्यम से संसाधित किया जाता है।’
भाषा पृथ्वी राजकुमार रमण
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