भारत डब्ल्यूईएफ के यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक में 31वें स्थान पर पहुंचा, जापान शीर्ष पर

भारत डब्ल्यूईएफ के यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक में 31वें स्थान पर पहुंचा, जापान शीर्ष पर

भारत डब्ल्यूईएफ के यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक में 31वें स्थान पर पहुंचा, जापान शीर्ष पर
Modified Date: September 25, 2026 / 03:10 pm IST
Published Date: September 25, 2026 3:10 pm IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) भारत अपने लागत-प्रतिस्पर्धी यात्रा परिवेश और समृद्ध सांस्कृतिक संसाधनों के चलते वैश्विक यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक में नौ पायदान ऊपर चढ़कर 31वें स्थान पर पहुंच गया है।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से जारी इस सूचकांक में जापान शीर्ष पर है। अमेरिका, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस भी शीर्ष पांच में शामिल हैं।

डब्ल्यूईएफ ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत को यात्रा के लिहाज से लागत-प्रतिस्पर्धी माहौल, समृद्ध सांस्कृतिक संसाधनों, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन मांग के बेहतर वितरण से लाभ मिला है।

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन बुनियादी ढांचे, सांस्कृतिक संसाधनों और कारोबारी यात्रा सुविधाओं में तेजी से सुधार ने भारत की रैंकिंग में बड़ी बढ़त में योगदान दिया है।

हालांकि, कार्यबल के कौशल, पर्यावरणीय स्थिरता और पर्यटन बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता अब भी भारत के लिए प्रमुख चुनौतियां हैं।

चीन, भारत और मेक्सिको विश्व धरोहर के सांस्कृतिक स्थलों की संख्या के मामले में भी शीर्ष 10 में शामिल हैं।

वैश्विक स्तर पर 110 में से 101 अर्थव्यवस्थाओं का सूचकांक स्कोर 2024 से 2026 के दौरान बेहतर हुआ है। इस अवधि में औसत स्कोर 2.1 प्रतिशत बढ़ा, जो 2019 के बाद सबसे तेज वृद्धि है।

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि इस सुधार को सांस्कृतिक संसाधनों, पर्यटन बुनियादी ढांचे और सेवाओं, हवाई संपर्क तथा कारोबारी यात्रा में बढ़ोतरी से बल मिला।

डब्ल्यूईएफ की अनुभव अर्थव्यवस्था एवं शहर इकाई की प्रमुख राम्या कृष्णास्वामी ने कहा, ‘‘नवीनतम यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक से पता चलता है कि यात्रा और पर्यटन के लिए अनुकूल परिस्थितियां महामारी के बाद सबसे मजबूत स्तर पर हैं। 2024 के बाद 92 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं में सुधार हुआ है।’’

हालांकि, 2024 से 2026 के बीच चार में से तीन अर्थव्यवस्थाओं में यात्रा कम किफायती हुई। वहीं, पर्यटन निवेश बढ़ती मांग के अनुरूप नहीं बढ़ पाया और श्रम की कमी ने क्षेत्र की आगे की वृद्धि के लिए चुनौती पैदा की।

इस दौरान स्थानीय समुदायों को मिलने वाले लाभ में भी कमी आई। रिपोर्ट के अनुसार, अधिक पर्यटकों के आने से अपने आप बेहतर आजीविका या बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरियां सुनिश्चित नहीं होतीं, खासकर उन पर्यटन स्थलों पर जहां पर्यटन काफी हद तक मौसमी होता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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