नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने से पहले भारत को अपना खाद्य सुरक्षा तंत्र मजबूत करना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी नियमों का इस्तेमाल छिपे हुए व्यापार अवरोध के रूप में न हो।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा नहीं करने पर भारत का बाजार यूरोपीय खाद्य उत्पादों के लिए अधिक खुल सकता है, जबकि भारतीय कृषि निर्यात को यूरोपीय सीमाओं पर खारिज किए जाने का जोखिम बना रहेगा।
भारत और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले वर्ष की शुरुआत में इसके लागू होने की संभावना है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव और ‘सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट एंड एग्रीकल्चर’ की शांत्वना दीक्षित द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में उपभोक्ताओं की सुरक्षा, किसानों के समर्थन और कृषि निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए आधुनिक, विज्ञान-आधारित और पारस्परिक खाद्य सुरक्षा प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को ‘खेत से बंदरगाह’ तक ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने, कीटनाशक उपयोग पर सख्त दिशानिर्देश लागू करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने, अवशेषों की नियमित निगरानी करने और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), सीमा शुल्क तथा क्वारंटीन एजेंसियों द्वारा कड़ा प्रवर्तन सुनिश्चित करना चाहिए।
साथ ही, आयातित खाद्य पदार्थों की जांच भी उसी सख्ती से की जानी चाहिए, जैसी भारतीय निर्यात पर विदेशों में होती है। रिपोर्ट में जोखिम-आधारित नमूना संग्रहण और प्रयोगशाला परीक्षण की व्यवस्था तथा मानकों पर खरे न उतरने वाले आयात को खारिज करने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में निर्यात बाजारों में नियामकीय बदलावों पर नजर रखने और निर्यातकों को समय पर चेतावनी देने के लिए एक समर्पित ‘खाद्य सुरक्षा निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रकोष्ठ’ स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईयू ने भारतीय उत्पादों के खिलाफ 365 खाद्य सुरक्षा आदेश जारी किए हैं, जिससे खेपों की वापसी, नष्ट करने और कड़ी जांच जैसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। वहीं, ईयू में कीटनाशक उपयोग भारत के मुकाबले 11 गुना अधिक होने के बावजूद भारत में आयातित खाद्य की जांच अपेक्षाकृत सीमित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारतीय कृषि निर्यात ईयू के कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों के कारण बाधित होते रहे, तो व्यापार समझौते के तहत शुल्क में कमी का लाभ सीमित रह जाएगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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