भारत, अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीबः वाणिज्य सचिव

भारत, अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीबः वाणिज्य सचिव

भारत, अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीबः वाणिज्य सचिव
Modified Date: January 15, 2026 / 07:03 pm IST
Published Date: January 15, 2026 7:03 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और दोनों पक्षों के तैयार होने पर इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों के वार्ताकार दल व्यापार समझौते के लगभग सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘यह पूरा होने के बहुत करीब है, लेकिन हम कोई समय-सीमा नहीं दे सकते हैं। यह तब होगा जब दोनों पक्ष तैयार होंगे और यह महसूस करेंगे कि घोषणा का सही समय है।’

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अग्रवाल ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में यह स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत कभी नहीं टूटी थी और दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं।

सितंबर में भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाए जाने के बाद व्यापार समझौते पर बातचीत कुछ समय के लिए सुस्त पड़ गई थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर के साथ ऑनलाइन बैठक की थी। यह बैठक 10-11 दिसंबर को अमेरिका के उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्ज़र के नेतृत्व में आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद हुई।

भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने 12 जनवरी को कहा कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। गोर ने अपने स्वागत भाषण में कहा था, ‘असली मित्रों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आखिर में हमेशा उन्हें सुलझा लेते हैं।’

इसके साथ ही अग्रवाल ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार की सकारात्मक वृद्धि पर संतोष जताया।

जब उनसे व्यापार समझौता संपन्न न हो पाने की किसी संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम सभी व्यापार वार्ताओं में सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं…। दोनों पक्ष जुड़े हुए हैं। इसलिए मुझे लगता है कि इसे अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।’

दोनों देशों ने पिछले साल की शुरुआत में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू की थी। इस दौरान कई दौर की वार्ताएं भी आयोजित की गईं। हालांकि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को लेकर गतिरोध की स्थिति देखी गई।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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