मुंबई, 25 अगस्त (भाषा) भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत घरेलू मांग और बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के दम पर उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। मानसून की स्थिति सुधरने से कृषि क्षेत्र के जोखिम भी कुछ कम हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मंगलवार को जारी बुलेटिन में यह बात कही गई।
आरबीआई के अगस्त बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ संबंधी लेख में कहा गया है कि अमेरिका के अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क का भारत पर पड़ोसी चीन और कुछ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम असर पड़ने की संभावना है।
लेख के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक भू-राजनीतिक माहौल और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग मजबूत बनी हुई है तथा विनिर्माण एवं सेवा गतिविधियों में तेजी आई है।
जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून में सुधार हुआ, जबकि जून में इसमें कमी दर्ज की गई थी। इससे खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य रकबे के करीब पहुंची और कृषि क्षेत्र के कुछ जोखिम कम हुए।
जुलाई में अधिक बारिश होने से देशभर के जलाशयों में पानी का भंडार पिछले 10 साल के औसत के करीब पहुंच गया और इससे पहले के स्तर से भी अधिक रहा।
अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क के संबंध में लेख में कहा गया कि अमेरिका को भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद-स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और दवाएं, इस शुल्क के दायरे से बाहर हैं।
लेख में कहा गया, “ऐसे में भारत पर इसका असर चीन, वियतनाम और थाइलैंड जैसी कुछ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम रहने की संभावना है।”
बुलेटिन के मुताबिक, जून में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में मई की तुलना में सुधार हुआ। कुल इक्विटी प्रवाह का करीब 74 प्रतिशत सिंगापुर, नीदरलैंड, अमेरिका और कनाडा से आया।
सबसे अधिक इक्विटी निवेश विनिर्माण क्षेत्र को मिला और उसके बाद बिजली उत्पादन तथा कंप्यूटर एवं संचार सेवाओं का स्थान रहा।
वहीं, भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश पिछले दो महीनों से घट रहा है। भारतीय कंपनियों के विदेशों में किए गए प्रत्यक्ष निवेश में करीब 65 प्रतिशत हिस्सा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका का रहा। वित्तीय, बीमा और व्यावसायिक सेवाओं, विनिर्माण, थोक एवं खुदरा कारोबार, रेस्तरां और होटल क्षेत्रों ने मिलकर विदेशों में किए गए प्रत्यक्ष निवेश का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।
हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और वे केंद्रीय बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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