भारतीय निर्यातक अमेरिका को निर्यात पर शुल्क दर को लेकर असमंजस की स्थिति में
भारतीय निर्यातक अमेरिका को निर्यात पर शुल्क दर को लेकर असमंजस की स्थिति में
नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से नए वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा के बाद भारतीय निर्यातकों के बीच 24 फरवरी से प्रभावी शुल्क की दर को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
पिछले सप्ताह अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ व्यापक शुल्क लगाने वाले ट्रंप के आदेश को अवैध ठहरा दिया था। उसके तत्काल बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश जारी कर दिया।
हालांकि, आदेश जारी होने के कुछ घंटों के भीतर ट्रंप ने इस शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक करने की घोषणा कर दी लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इससे निर्यातक समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, “वर्तमान आदेश के अनुरूप 24 फरवरी से भारतीय वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा। लेकिन 15 प्रतिशत शुल्क को लेकर कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है, इसलिए अनिश्चितता बनी हुई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि 150 दिन के बाद की शुल्क व्यवस्था को लेकर भी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
मुंबई स्थित टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के संस्थापक चेयरमैन शरद कुमार सराफ ने कहा, ‘‘भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका प्रमुख बाजार है और आयात शुल्क को लेकर अस्थिरता होने से कारोबारी धारणा पर असर पड़ता है। शुल्क से जुड़े इस नाटक पर अब पर्दा गिर जाना चाहिए।’’
यह 10 प्रतिशत शुल्क अमेरिका के मौजूदा एमएफएन (सर्वाधिक तरजीही देश) शुल्क के ऊपर लगेगा। मसलन, अगर किसी उत्पाद पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लगता है, तो अमेरिका में उसके आयात पर प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत हो जाएगा। इससे पहले यह पांच प्रतिशत के साथ 25 प्रतिशत अतिरिक्त यानी कुल 30 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
फुटवियर निर्यातक और फ्लोरेंस शू कंपनी के चेयरमैन अकील पनारुना ने कहा कि अमेरिकी शीर्ष अदालत के फैसले से 10-15 प्रतिशत की प्रभावी शुल्क सीमा को लेकर कुछ स्पष्टता आई है, जिससे वैश्विक खरीद में पहले से अनुमान लगा पाने की क्षमता बढ़ी है।
वहीं, मेगा मोडा के प्रबंध निदेशक योगेश गुप्ता ने कहा कि 10 प्रतिशत की दर से अमेरिकी बाजार को होने वाला निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वर्ष 2021-25 के दौरान अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार रहा और भारत के कुल निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को गया। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर रहा।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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