भारतीय चाय निर्यातकों का चाय बोर्ड से समर्थन का आग्रह
भारतीय चाय निर्यातकों का चाय बोर्ड से समर्थन का आग्रह
कोलकाता, 26 जून (भाषा) भारतीय चाय निर्यातक वर्ष 2023 में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार से समर्थन की मांग की है। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष और यूरोप तथा खाड़ी देशों जैसे पारंपरिक बाजार से चाय की मांग में गिरावट जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उन्होंने सरकार से समर्थन मांगा है।
चाय निर्यातकों को वर्ष 2022 में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने के बाद चालू वित्त वर्ष में निर्यात में 10 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट का अनुमान है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण चाय उद्योग इस बात को लेकर भी आशंकित है कि चालू वित्त वर्ष में वे कितनी मात्रा में उत्पादन कर पाएंगे।
जनवरी-मार्च 2023 की अवधि में कुल निर्यात छह प्रतिशत घटकर 4.81 करोड़ किलोग्राम रह गया।
भारतीय चाय निर्यातक संघ के अध्यक्ष अंशुमन कनोरिया ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘वर्ष 2023 के लिए परिदृश्य बहुत उम्मीदों वाला नहीं है। वर्ष 2022 में मुख्य रूप से श्रीलंका में कम फसल होने की स्थिति के कारण अच्छी वृद्धि देखी गई थी। श्रीलंका चाय निर्यात में अब थोड़ा सुधार हुआ है और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियां भारतीय चाय निर्यात की मात्रा और मूल्य को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, निर्यातकों को चाय निर्यात में 10 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है और 20 करोड़ किलोग्राम का आंकड़ा पार करना चुनौतीपूर्ण होगा।
कनोरिया का मानना है कि इसके अलावा, नेपाल से सस्ते आयात के साथ भारतीय चाय निर्यात में वास्तविक गिरावट कहीं अधिक होगी।
चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में चाय का कुल निर्यात 22.8 करोड़ किलोग्राम था।
बागरिया समूह के अध्यक्ष एस एस बागरिया ने कहा कि चाय निर्यातक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के सामने आने से घबरा रहे हैं।
बगारिया ने कहा कि रूस, ईरान और अमेरिका जैसे पारंपरिक बाजारों ने पिछले साल अच्छी वृद्धि दर्ज की थी, लेकिन रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण मांग प्रभावित हुई है। निर्यातकों ने कहा कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उन्हें वाणिज्य मंत्रालय से समर्थन की जरूरत है।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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