नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) देश में प्रौद्योगिकी, औद्योगिक क्षेत्रों और पूंजी बाजारों में संपत्ति सृजन से 2031 तक अत्यधिक नेटवर्थ वाले व्यक्तियों की संख्या 25,217 और अरबपतियों की 313 होने का अनुमान है।
अत्यधिक नेटवर्थ वाले व्यक्ति (यूएचएनडब्ल्यूआई) वे होते हैं जिनकी कुल संपत्ति तीन करोड़ डॉलर या उससे अधिक होती है। वर्तमान में भारत में ऐसे व्यक्तियों की संख्या 19,877 है। जबकि अरबपतियों की संख्या 207 हैं।
रियल एस्टेट सलाहकार नाइट फ्रैंक ने अपनी ‘द वेल्थ रिपोर्ट 2026’ बृहस्पतिवार को जारी की। इसमें कहा गया कि वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती ब्याज दरों की चिंताओं और असमान आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद वैश्विक संपत्ति सृजन में ‘तेजी से वृद्धि’ हुई है।
नाइट फ्रैंक के अनुसार, ‘‘ भारत में यूएचएनडब्ल्यूआई की संख्या 19,877 से बढ़कर 2031 तक 25,217 होने का अनुमान है, जो वैश्विक संपत्ति परिदृश्य में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। साथ ही प्रौद्योगिकी, औद्योगिक क्षेत्रों और पूंजी बाजारों में असाधारण संपत्ति सृजन को भी रेखांकित करता है।’’
भारत में यूएचएनडब्ल्यूआई की कुल संख्या में मुंबई की हिस्सेदारी 35.4 प्रतिशत है। भारत अब दुनिया में यूएचएनडब्ल्यूआई की छठी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।
वैश्विक स्तर पर यूएचएनडब्ल्यूआई की संख्या 2021 के 5,51,435 से बढ़कर 7,13,626 हो गई है।
नाइट फ्रैंक के अनुसार, देश में पिछले पांच वर्ष में अरबपतियों की संख्या 58 प्रतिशत बढ़कर 2026 में 207 हो गई है जिससे यह अमेरिका (914) और चीन (485) के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है।
देश में अरबपतियों की संख्या 2026 की शुरुआत के 207 से बढ़कर 2031 तक 51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 313 होने का अनुमान है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, ‘‘ भारत में धनवानों की संख्या का बढ़ना उसकी आर्थिक विकास को दर्शाता है। यह अधिक उद्यमशील अर्थव्यवस्था बनते हुए मजबूत पूंजी भंडार, अधिक विकसित वित्तीय बाजारों और वैश्विक स्तर पर जुड़े संस्थापकों एवं निवेशकों के बढ़ते समूह के साथ आगे बढ़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण, सूचीबद्ध शेयर बाजार, निजी पूंजी और पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यवसाय सभी इसमें भूमिका निभाते हैं।
भाषा निहारिका रमण
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