नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) यूरोपीय संघ (ईयू) भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ दीर्घकालिक व्यापार और निवेश साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की आर्थिक क्षमता का दोहन करना है। इसके तहत हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, दवा, चाय तथा कृषि-खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
यूरोप का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचेगा। इस दौरे का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा सहित आठ पूर्वोत्तर राज्यों के साथ गहन आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
ईयू के नयी दिल्ली स्थित मिशन ने कहा कि यह पहल जनवरी में हुए ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में तय व्यापक रणनीतिक एजेंडे के अनुरूप है।
मिशन के अनुसार, यह दौरा ईयू-भारत सहयोग में एक नए अध्याय का संकेत है, जिसका उद्देश्य नवाचार, स्थिरता और समावेशी विकास के माध्यम से पूर्वोत्तर की आर्थिक क्षमता को सशक्त बनाना है।
प्रतिनिधिमंडल में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के राजदूत और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनमें ईयू राजदूत हर्वे डेल्फिन भी होंगे। इसके साथ ही यूरोपीय व्यापार प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे।
डेल्फिन ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम, अपने संसाधनों और कुशल कार्यबल के कारण तेज़ी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल है और यह भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाले क्षेत्रों में से एक है।
प्रतिनिधिमंडल असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के साथ द्विपक्षीय बैठक करेगा, जबकि यूरोपीय व्यवसायिक प्रतिनिधियों का एक दल फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिज़नेस इन इंडिया (एफईबीआई) के नेतृत्व में राज्य के अधिकारियों के साथ व्यापार और निवेश अवसरों पर चर्चा करेगा।
प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को ‘ब्लू वैलीज़: भारत और यूरोप के बीच इकोसिस्टम और वैल्यू चेन निर्माण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लेगा।
यह कार्यक्रम असम सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें यूरोपीय और भारतीय कंपनियां सतत मूल्य शृंखला, उद्योग और नवाचार में साझेदारी पर विचार-विमर्श करेंगी।
डेल्फिन ने कहा कि ‘ब्लू वैलीज’ जैसी पहलों के माध्यम से केवल सहयोग पर चर्चा नहीं हो रही, बल्कि वास्तविक दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारियां विकसित की जा रही हैं।
भाषा योगेश प्रशांत
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