देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था 2030 तक 1,900 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था 2030 तक 1,900 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था 2030 तक 1,900 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट
Modified Date: August 4, 2026 / 08:33 pm IST
Published Date: August 4, 2026 8:33 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) देश में उपभोक्ता आधारित अर्थव्यवस्था 2030 तक 1,900 अरब डॉलर के करीब पहुंचने की उम्मीद है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से उपयोग, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और नए वाणिज्य मॉडल के उभरने से होगी। डेलॉयट इंडिया-फिक्की की मंगलवार को जारी संयुक्त रिपोर्ट में यह कहा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स क्षेत्र यानी ऑनलाइन बाजार 2030 तक करीब 260 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि फटाफट सामान पहुंचाने वाले क्षेत्र का आकार 50 अरब डॉलर तक बढ़ने की संभावना है।

‘उपभोक्ता रुझान : वृद्धि और संचालन को नई गति’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई अपनाने के मामले में भारत शीर्ष 15 देशों में पहले स्थान पर है। कंपनियां उपभोक्ता जुड़ाव, उत्पाद नवोन्मेष और मांग अनुमान जैसे क्षेत्रों में तेजी से एआई का इस्तेमाल कर रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि और संचालन व्यवस्था अब एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं। डिजिटल भरोसा, पारदर्शिता और नियामकीय स्पष्टता दीर्घकालीन प्रतिस्पर्धी क्षमता के लिए महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एक नया भारतीय उपभोक्ता वर्ग उभर रहा है। यह वर्ग डिजिटल को अपनाने, एआई आधारित उत्पाद खोज और सुविधा और पारदर्शिता को महत्व दे रहा है।

डेलॉयट इंडिया के भागीदार और उपभोक्ता उद्योग के प्रमुख आनंद रामनाथन ने कहा, ‘‘भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था 2030 तक 1,900 अरब डॉलर के करीब पहुंचने की उम्मीद है। इससे उन इकाइयों के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे जो तेजी से बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल सकेंगी।’’

उन्होंने कहा कि भविष्य में वृद्धि इस बात पर अधिक निर्भर करेगी कि कंपनियां एआई का कितना प्रभावी इस्तेमाल करती हैं, अपनी परिचालन क्षमता को कितना मजबूत बनाती हैं, जुड़े हुए वाणिज्य तंत्र में किस तरह भाग लेती हैं और उपभोक्ता जानकारी को अलग पहचान वाले अनुभवों में कैसे बदलती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति श्रृंखला पहले मुख्य रूप से दक्षता पर केंद्रित थी, लेकिन अब बेहतर योजना, पूर्वानुमान और विविध स्रोतों में निवेश के जरिये इसे अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट में भारत के एफएमसीजी (दैनिक उपयोग का सामान), खुदरा और ई-कॉमर्स क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले छह प्रमुख रुझानों की पहचान की है। इनमें एआई आधारित कारोबारी बदलाव, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं, वाणिज्य परिवेश का विस्तार, भारतीय उपभोक्ता ब्रांड का बढ़ता वैश्वीकरण आदि शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 74 प्रतिशत उपभोक्ता खरीदारी से पहले उत्पादों में मौजूद सामग्री या पोषण संबंधी जानकारी की समीक्षा करते हैं, जबकि 63 प्रतिशत उपभोक्ता उत्पादों का चयन उनकी संरचना और सामग्री के आधार पर करते हैं। आधे से अधिक उपभोक्ता बेहतर स्वास्थ्य और पारदर्शिता से जुड़े मानकों की तलाश में ब्रांड बदल रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई अपनाने के मामले में भारत शीर्ष 15 देशों में पहले स्थान पर है। कंपनियां उपभोक्ता जुड़ाव, उत्पाद नवोन्मेष, मांग अनुमान और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेजी से इस प्रौद्योगिकी को अपना रही हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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