UP Kanwar Yatra 2026: योगी सरकार की तैयारियों का दिखा असर, कावड़ यात्रियों को मिली सुरक्षा तो महिलाएं भी निकली शिव भक्ति की राह पर, पढ़िए ये विशेष लेख

योगी सरकार की तैयारियों का दिखा असर, कावड़ यात्रियों को मिली सुरक्षा तो महिलाएं भी निकली शिव भक्ति की राह पर, Women Kanwar Yatri in Uttar Pradesh

UP Kanwar Yatra 2026: योगी सरकार की तैयारियों का दिखा असर, कावड़ यात्रियों को मिली सुरक्षा तो महिलाएं भी निकली शिव भक्ति की राह पर, पढ़िए ये विशेष लेख
Modified Date: August 4, 2026 / 07:59 pm IST
Published Date: August 4, 2026 7:59 pm IST

प्रयागराजः UP Kanwar Yatra 2026: सावन का महीना आते ही उत्तर प्रदेश के कस्बों और गांवों में एक जाना-पहचाना उत्साह दिखाई देने लगा है। कंधों पर बांस की कांवड़, भगवा वस्त्र, बोल बम के जयकारे और गंगाजल से भरे पात्र लेकर श्रद्धालु पैदल मीलों का सफर तय करने निकलने लगे हैं। बरसों तक यह दृश्य पुरुष कांवड़ियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से इसमें महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। प्रयागराज से तो महिला शिव भक्तों की की टोलियां कांवड़ उठाकर काशी और अन्य शिवालयों की ओर निकलती हैं। इस साल उनकी संख्या और देखी जा रही है।

तीन पीढ़ियां, एक यात्रा

UP Kanwar Yatra 2026: प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर महिलाओं के समूह को जल भरते देखा जा सकता है। सदियापुर की मीरा देवी परिवार के आठ सदस्यों के साथ हर बार जल लेकर बैजनाथ धाम की यात्रा पर निकलती हैं। उनके साथ उनकी बहुएं, बेटी, नातिन और बेटा, तीन पीढ़ियां एक साथ इस भक्ति-यात्रा में शामिल होती हैं। मीरा देवी कहती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा या असुविधा महसूस नहीं होती, इसीलिए परिवार की महिलाएं निसंकोच इस यात्रा का हिस्सा बनती हैं। दारागंज की निधि जैसी युवतियां भी हर साल इस परंपरा में अपनी जगह बनाती हैं। वे बताती हैं कि रास्ते में सुरक्षित माहौल मिलने से उनके गांव-कस्बे से हर सावन कई और महिलाएं भी कांवड़ यात्रा में शामिल होने लगी हैं।

सुरक्षा और सुविधा की मजबूत कड़ी

महिलाओं की इस बढ़ती भागीदारी के पीछे एक बड़ी वजह है यात्रा मार्गों में किए गए सुरक्षा और सुविधा के इंतजाम। प्रयागराज में संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर महिला शिव भक्तों के लिए चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए जाते हैं। घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात रहते हैं, ताकि हर महिला कांवड़िया निर्भय होकर जलाभिषेक की तैयारी कर सके। आजीविका मिशन से जुड़ी ‘आपदा सखियां’ भी हर सावन में महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हो जाती हैं। प्रयागराज से वाराणसी के बीच बने कांवड़ पथ पर भी जगह-जगह महिला पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात किए जाते हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव और ब्रह्मेश्वर महादेव जैसे शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में भी महिला सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है।

भक्ति में भागीदारी, समाज में बदलाव

जो लंबी कतारें कभी सिर्फ शिवालयों के भीतर महिला भक्तों की दिखती थीं, वे अब यात्रा मार्गों पर भी नजर आती हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन-कीर्तन गाते हुए, पूरे हर्ष और उत्साह के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं तो यह इस बात का संकेत है कि जब सार्वजनिक स्थानों और यात्रा मार्गों में सुरक्षा का भरोसा मिलता है, तो महिलाएं खुलकर घरों से बाहर निकलती हैं और सामूहिक आयोजनों का हिस्सा बनती हैं।

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लेखक के बारे में

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