नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) सख्त वित्तीय स्थितियों, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि महंगाई के बढ़ते दबाव के चलते मौद्रिक नीति का मुख्य ध्यान मूल्य स्थिरता पर बना रह सकता है।
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री एवं कार्यकारी निदेशक राव ने वृहद आर्थिक परिदृश्य के अपने आकलन में कहा कि मजबूत घरेलू मांग, उपभोग, सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और विनिर्माण के दम पर पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी, जिससे भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत स्थिति में की।
उन्होंने आगे कहा कि डीबीएस का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में आर्थिक वृद्धि औसतन 7.3 प्रतिशत रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित आंकड़ों के मुताबिक यह 7.8 प्रतिशत थी।
राव ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह, ई-वे बिल, बिजली की मांग और डिजिटल भुगतान जैसे उच्च-आवृत्ति संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, सख्त वित्तीय स्थितियों, ऊर्जा की ऊंची लागत और आधार प्रभाव के चलते चालू वित्त वर्ष के उत्तरार्ध में वृद्धि की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।
भाषा पाण्डेय
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