भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: विश्व बैंक

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भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: विश्व बैंक

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 09:46 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 09:46 PM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 11 जून (भाषा) भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में कम होकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पिछले साल यह 7.7 प्रतिशत थी। हालांकि, इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विश्व बैंक ने बृहस्पतिवार को यह अनुमान लगाया।

विश्व बैंक ने ‘वैश्विक आर्थिक संभावनाएं’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल, 2026 से मार्च, 2027) में भारत की वृद्धि दर धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ऊर्जा की ऊंची कीमत और अन्य कच्चे माल की लागत के कारण निजी मांग में कमी आने के कारण वृद्धि दर धीमी पड़ने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती से उपभोक्ता मांग को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है। साथ ही, यह भी उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 में अर्थव्यवस्था फिर से 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल कर लेगी।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता के बावजूद, इस साल की शुरुआत में भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं, जिसे घरेलू मांग से समर्थन मिला।

निजी खपत, खासकर ग्रामीण इलाकों में मजबूत रही है और शहरी मांग में भी सुधार हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू बिक्री से कर संग्रह में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, ऊर्जा की ऊंची लागत और कृषि उत्पादों खासकर उर्वरकों की कमी से कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए ईंधन कर में कटौती समेत कई कदम उठाए गए हैं।

विश्व बैंक ने कहा, ‘‘अमेरिका के शुल्क में कमी और मुक्त व्यापार समझौता लागू होने की उम्मीद से संघर्ष के कारण बाहरी मांग खासकर निर्यात पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद मिल सकती है।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘घरेलू मांग में मजबूती और निर्यात वृद्धि में तेजी से अगले दो वित्त वर्ष में वृद्धि दर के फिर से बढ़ने की उम्मीद है।’’

दक्षिण एशियाई क्षेत्र में वृद्धि दर 2026 में घटकर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष है। इससे ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, तेल और प्राकृतिक गैस की कम आपूर्ति और विदेश में काम करने वाले दूसरे देशों द्वारा अपने देश में पैसा भेजने में कमी तथा पर्यटन में बाधाएं शामिल हैं।

भाषा रमण अजय

अजय