भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता 7.5 गीगावाट घंटा से अधिक: श्रीपाद नाइक

भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता 7.5 गीगावाट घंटा से अधिक: श्रीपाद नाइक

भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता 7.5 गीगावाट घंटा से अधिक: श्रीपाद नाइक
Modified Date: July 9, 2026 / 06:47 pm IST
Published Date: July 9, 2026 6:47 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) बिजली, नयी और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने 7.5 गीगावाट-घंटा की ऊर्जा भंडारण क्षमता स्थापित कर ली है और 140 गीगावाट-घंटे से अधिक क्षमता वाली परियोजनाएं निर्माण, आवंटन या निविदा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।

नाइक ने 12वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (आईईएसडब्ल्यू) 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 53 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की है।

उन्होंने कहा कि सरकार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने कहा, ‘भारत ने करीब 7.5 गीगावाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता चालू कर दी है, जबकि 140 गीगावाट-घंटे से अधिक क्षमता वाली परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, आवंटित की जा चुकी हैं या निविदा प्रक्रिया में हैं।’

नाइक ने कहा, ‘अगर हमें वास्तव में एक लचीला ग्रिड बनाना है, तो इसके क्रियान्वयन में और तेजी लानी होगी क्योंकि अब इस जरूरत को केवल गीगावाट में नहीं मापा जाता, बल्कि इसे बदलते तंत्र के साथ तुरंत तालमेल बिठाने की क्षमता से आंका जाता है।’

उन्होंने रेखांकित किया कि पीएम सूर्य घर, पीएम कुसुम और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी योजनाएं ऊर्जा उत्पादन और खपत के तौर-तरीकों को बदल रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘कई वर्षों तक भारत की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि क्या हम पर्याप्त बिजली पैदा कर पाएंगे। आज सवाल बदल गया है। अब चुनौती यह है कि क्या हम सही समय और सही स्थान पर सही मात्रा में बिजली उपलब्ध करा सकते हैं। यही ग्रिड लचीलेपन की चुनौती है।’

इस अवसर पर नाइक ने यस बैंक की रिपोर्ट ‘डेवलप्ड एडवांस्ड बैटरी वैल्यू चेन कैपेबिलिटीज इन इंडिया’ भी जारी की।

उन्होंने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के हालिया शोध पत्र ‘द डक एंड द कैमल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय बिजली ग्रिड अब केवल उत्पादन क्षमता की कमी से प्रभावित नहीं है, बल्कि समय और लचीलेपन से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।

भाषा योगेश अजय

अजय


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