रिफाइनरी रखरखाव, घरेलू मांग बढ़ने से भारत का ईंधन निर्यात 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर

रिफाइनरी रखरखाव, घरेलू मांग बढ़ने से भारत का ईंधन निर्यात 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर

रिफाइनरी रखरखाव, घरेलू मांग बढ़ने से भारत का ईंधन निर्यात 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर
Modified Date: June 3, 2026 / 04:04 pm IST
Published Date: June 3, 2026 4:04 pm IST

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) रिफाइनरियों में रखरखाव कार्य, उत्पादन प्राथमिकताओं में बदलाव और घरेलू मांग बढ़ने के कारण भारत के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मई में घटकर लगभग साढ़े नौ लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो अक्टूबर, 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

डेटा विश्लेषण कंपनी ”केप्लर’ के अनुसार, मई में परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात घटकर करीब साढ़े नौ लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इससे पहले अक्टूबर, 2022 में निर्यात औसतन 9.26 लाख बैरल प्रतिदिन था।

‘केप्लर’ में मॉडल एवं रिफाइनिंग प्रबंधक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘‘निर्यात में यह तेज गिरावट रिफाइनरियों में कम प्रसंस्करण, रखरखाव गतिविधियों और घरेलू बाजार पर बढ़ते जोर के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।’’

उन्होंने कहा कि इस गिरावट का एक प्रमुख कारण भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी और परिष्कृत ईंधन की प्रमुख निर्यातक रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर रिफाइनिंग परिसर में नियोजित रखरखाव कार्यक्रम रहा। इसके चलते कच्चे तेल के प्रसंस्करण की दर घटी और निर्यात के लिए उपलब्ध उत्पादों की मात्रा सीमित हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनरियों ने घरेलू बाजार के लिए रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उत्पाद मिश्रण में बदलाव किया, जिससे पेट्रोल और डीजल का उत्पादन अनुमानित 80,000 बैरल प्रतिदिन कम हो गया।

यह बदलाव घरेलू एलपीजी आपूर्ति आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया, जिसका असर मुख्य रूप से निर्यातोन्मुख पेट्रोल और डीजल के उत्पादन पर पड़ा।

सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों ने भी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं और घरेलू बाजार में पर्याप्त ईंधन उपलब्धता बनाए रखने के लिए अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा स्थानीय बाजार में भेजा। यह रुझान निर्यात की तुलना में घरेलू मांग को प्राथमिकता को दर्शाता है।

भाषा योगेश अजय

अजय


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