भारत की वृद्धि घटकर चालू वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत रह सकती है: बीएमआई

भारत की वृद्धि घटकर चालू वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत रह सकती है: बीएमआई

भारत की वृद्धि घटकर चालू वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत रह सकती है: बीएमआई
Modified Date: May 11, 2026 / 12:05 pm IST
Published Date: May 11, 2026 12:05 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) ईरान युद्ध से तेल कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक गति के कमजोर पड़ने के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 2025-26 में 7.7 प्रतिशत थी। फिच समूह की इकाई बीएमआई ने यह बात कही।

बीएमआई की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान-अमेरिका संघर्ष के और बढ़ने की आशंका उसके वृद्धि अनुमान के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा करती है। ऐसे में भारत को रक्षा खर्च, ईंधन कीमतों और राजकोषीय स्थिति के बीच तालमेल बैठाना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और आयकर में किए गए सुधार लागत-आधारित महंगाई के असर को आंशिक रूप से कम करेंगे। साथ ही नरम मौद्रिक नीति पूंजीगत निवेश को सहारा देगी क्योंकि युद्ध के कारण बढ़ी अनिश्चितता और ऊंची लागत निवेश को प्रभावित कर रही है।

बीएमआई के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ प्रतिशत रही जो उसके पहले के 7.8 प्रतिशत अनुमान से अधिक है।

संस्था ने 2025-26 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को 0.1 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.7 प्रतिशत कर दिया है।

बीएमआई ने कहा, ‘‘ हम वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7 प्रतिशत वृद्धि के अपने अनुमान को बरकरार रखते हैं क्योंकि पिछले वर्ष के कर सुधारों का प्रभाव नए वित्त वर्ष में बढ़ती लागत के चलते कम होता जाएगा।’’

इसमें कहा गया कि आर्थिक गति कमजोर पड़ने और तेल कीमतों के झटके से वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। कर सुधारों का असर अप्रैल-जून 2026 तिमाही तक कम होता दिखेगा।

बीएमआई ने कहा, ‘‘ हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ऊर्जा एवं खाद्य आपूर्ति में बाधाएं खपत वृद्धि को धीमा करेंगी और महंगाई बढ़ाएंगी।’’

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान में संघर्ष के कारण आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो चुकी है और इसे 6.7 प्रतिशत वृद्धि अनुमान में शामिल किया गया है।

साथ ही, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने ‘एल नीनो’ के कारण इस वर्ष मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, सामान्य एल नीनो का प्रभाव भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) पर 0.1 प्रतिशत तक पड़ सकता है।

बीएमआई ने कहा कि यह असर वित्त वर्ष 2025-26 से मिली आर्थिक गति को और कमजोर कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर 0.4 से 0.7 प्रतिशत अंक तक घट सकती है।

बीएमआई ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में बदलाव के प्रति भारत की अर्थव्यवस्था एशिया में सबसे संवेदनशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

गौरतलब है कि अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खारिज करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थीं जो 30 अप्रैल को बढ़कर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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