एफसीएनआर योजना को समय से पहले बंद करने का कारण लक्षित राशि प्राप्त होना: एसबीआई रिसर्च

एफसीएनआर योजना को समय से पहले बंद करने का कारण लक्षित राशि प्राप्त होना: एसबीआई रिसर्च

एफसीएनआर योजना को समय से पहले बंद करने का कारण लक्षित राशि प्राप्त होना: एसबीआई रिसर्च
Modified Date: August 17, 2026 / 07:52 pm IST
Published Date: August 17, 2026 7:52 pm IST

मुंबई, 17 अगस्त (भाषा) विदेशी मुद्रा प्रवासी बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा के लिए विशेष अदला-बदली सुविधा को समय से पहले बंद करने के भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले का कारण इसकी लागत नहीं बल्कि संभवत: लक्षित राशि का प्राप्त होना है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट ‘इकोरैप’ के अनुसार, इस योजना के तहत पांच साल में कुल जोखिम बचाव लागत करीब 10.5 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।

आरबीआई ने 14 अगस्त को विशेष अदला-बदली सुविधा के तहत एफसीएनआरबी-बी जमाओं के लिए सुविधा 30 सितंबर की निर्धारित तारीख से एक महीने पहले 31 अगस्त को बंद करने का फैसला किया है।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि 65-70 अरब डॉलर की संभावित एफसीएनआर(बी) राशि जुटाने और डॉलर-रुपये की औसत जोखिम लागत करीब तीन प्रतिशत सालाना रहने पर 70 अरब डॉलर के कोष के लिए सालाना अनुमानित लागत लगभग 2.1 अरब डॉलर बैठेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि पांच साल की जमा अवधि के दौरान जोखिम लागत तीन प्रतिशत पर बनी रहती है, तो कुल लागत जमा राशि का करीब 15 प्रतिशत यानी 10.5 अरब डॉलर होगी।

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि भारत का मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर है और हर साल करीब 20 अरब डॉलर अतिरिक्त भंडार जुटने का अनुमान है। ऐसे में पांच साल में 10.5 अरब डॉलर की जोखिम बचाव लागत मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार का केवल 1.45 प्रतिशत और अनुमानित भंडार का करीब 1.27 प्रतिशत होगी।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इसलिए तीन प्रतिशत जोखिम लागत के अनुमान के बावजूद एफसीएनआर(बी) अदला-बदली की अनुमानित लागत भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लक्ष्य की तुलना में काफी कम है।’’

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि यह लागत बाह्य नकदी और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य के मुकाबले कोई बड़ा समझौता नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, एफसीएनआर (बी) सुविधा को समय से पहले बंद करने का फैसला बाजार भागीदारों के लिए अप्रत्याशित था, क्योंकि आरबीआई गवर्नर ने हाल में संवाददाताओं से बातचीत में संकेत दिया था कि योजना को समय से पहले बंद करने की कोई मंशा नहीं है।

एसबीआई रिसर्च ने कहा, ‘‘सबसे संभावित कारण यह हो सकता है कि एफसीएनआर(बी) के तहत राशि जुटाने का लक्ष्य पहले ही हासिल हो चुका हो।’’

उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त तक एफसीएनआर(बी) जमा 52.3 अरब डॉलर थी, जबकि विदेशी मुद्रा ऋण और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) सहित इस सुविधा के तहत कुल राशि 56.8 अरब डॉलर थी।

एसबीआई रिसर्च ने अनुमान जताया है कि एफसीएनआर(बी) के तहत कुल राशि 60-65 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा ऋण तथा ईसीबी सहित कुल प्रवाह 80-85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बावजूद रुपये पर इसका असर सीमित रहा है। एफसीएनआर(बी) योजना शुरू होने के बाद शुरुआती स्तर की तुलना में रुपये में केवल करीब 0.1 प्रतिशत मजबूती आई है।

एसबीआई रिसर्च ने इसकी तुलना वर्ष 2013 से की, जब एफसीएनआर(बी) अदला-बदली सुविधा के बाद 31 अगस्त से 30 नवंबर के बीच रुपये में 4.9 प्रतिशत और मार्च, 2014 तक 8.8 प्रतिशत की मजबूती आई थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2013 की तुलना में मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां काफी अलग हैं, इसलिए रुपये की मजबूती की गति अलग हो सकती है। कुल मिलाकर इस कदम का रुख रुपये के लिए सकारात्मक रहने की संभावना है।

भाषा रमण अजय

अजय


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