नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) देश की विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां दिसंबर में दो साल के निचले स्तर पर आ गईं। नए ऑर्डर में धीमी वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। शुक्रवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई।
मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) नवंबर के 56.6 से दिसंबर में 55 पर आ गया।
खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है।
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में अर्थशास्त्र की कार्यकारी निदेशक पॉलियाना डी लीमा ने कहा, ‘‘ वृद्धि की गति धीमी होने के बावजूद भारत के विनिर्माण उद्योग ने 2025 का समापन अच्छी स्थिति में किया। नए व्यवसायों में आई तीव्र वृद्धि से कंपनियों को वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही में व्यस्त रहने की उम्मीद है और प्रमुख मुद्रास्फीति दबावों की कमी मांग को समर्थन देना जारी रख सकती है।’’
एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सर्वेक्षण द्वारा ‘ट्रैक’ किए गए कई मापदंडों में 2025 कैलेंडर वर्ष के अंत में वृद्धि की गति धीमी हो गई। दो वर्ष में नए ऑर्डर में सबसे कमजोर उछाल के बीच उत्पादन वृद्धि 38 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई।
कुल बिक्री में आई मंदी का एक कारण अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में धीमी वृद्धि भी रही। नए निर्यात ऑर्डर में पिछले 14 महीनों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई।
दूसरी ओर एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के ग्राहकों से बेहतर मांग देखने को मिली।
सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘ वर्तमान अवधि में रोजगार सृजन की गति सबसे कम रही…’’
कीमतों के मोर्चे पर सर्वेक्षण में कहा गया कि कच्चे माल की लागत में ऐतिहासिक रूप से नगण्य गति से वृद्धि हुई है। साथ ही, ‘मूल्य मुद्रास्फीति’ की दर नौ महीनों के निचले स्तर पर आ गई है।
भारतीय वस्तु उत्पादकों को 2026 में वर्तमान स्तर की तुलना में उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है लेकिन समग्र भावना का स्तर लगभग साढ़े तीन वर्ष में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 कंपनियों के एक समूह में क्रय प्रबंधकों को भेजे गए सवालों के जवाबों के आधार पर तैयार किया है।
भाषा निहारिका मनीषा
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