मुंबई, सात मार्च (भाषा) केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि वे पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए शुल्क में कटौती, छूट या माफी (जैसे जहाज शुल्क में बदलाव) के अनुरोधों पर विचार करें। इसके साथ ही मंत्रालय ने बंदरगाहों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है।
शुक्रवार को सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद जारी की गई इस एसओपी के तहत प्रत्येक बंदरगाह विभाग के प्रमुख या उप-प्रमुख स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा। यह अधिकारी बंदरगाहों पर विचार के लिए आने वाले मुद्दों के समाधान के लिए एकल संपर्क बिंदु होगा।
नोडल अधिकारी मामले को सक्षम प्राधिकारी के पास ले जाने और 24 से 72 घंटों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा।
एसओपी के अनुसार, बंदरगाहों के चेयरपर्सन को पोत परिवहन मार्गों, निर्यातकों, टर्मिनल संचालकों और सीमा शुल्क जैसे हितधारकों के साथ समय-समय पर बैठकें करनी चाहिए। इसका उद्देश्य स्थिति की बारीकी से निगरानी करना और जायज चिंताओं को दूर करना है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि बंदरगाह सुविधा के तौर पर उपयोगकर्ताओं के अनुरोधों, जैसे कि भंडारण शुल्क में कमी या माफी और जहाज शुल्क में बदलाव जैसे मामलों पर बंदरगाह की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर मामला-दर-मामला विचार कर सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि बंदरगाह जल्दी खराब होने वाले सामान को प्राथमिकता के आधार पर संभालें ताकि उसे नुकसान न पहुंचे। साथ ही पश्चिम एशिया से लौटने वाले निर्यात माल को प्राथमिकता दी जाए और जहां संभव हो, संभावित मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ईंधन भरने (बंकरिंग) की क्षमता प्रदान की जाए।
अधिसूचना में कहा गया है कि इन उपायों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर लागू करने के लिए बंदरगाहों को सीमा शुल्क, डीजीएफटी और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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